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भगवान शिव का धनुष टूटते ही श्रीराम के जयकारों से गूंज उठी जनकपुरी

Fri, 04 Oct 2019 12:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2019 12:24 AM IST
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घोसी नगर की रामलीला में रामलीला का मंचन करते कलाकार। - फोटो : MAU
पिपरीडीह। परदहा ब्लाक के पिपरीडीह बाजार में मां काली मंदिर प्रागंण में विराट पूजा एवं रामलीला दुर्गा समिति द्वारा चल रहे रामलीला में बुधवार की देर शाम चौथे दिन अहिल्या उद्धार, गंगा दर्शन, जनकपुरी आगमन, नगर दर्शन व गौरी पूजन लीलाओं का मंचन किया गया। चौथे दिन रामलीला मंचन में जनकपुरी आगमन का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। सीता स्वयंवर का निमंत्रण मिलते ही गुरु विश्वामित्र राम व लक्ष्मण को लेकर जनकपुर निकल पड़े। रास्ते में एक पत्थर श्रीराम के चरणों से टकरा गया। देखते ही देखते पत्थर से एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। विश्वामित्र यह कथा राम को बताने लगते हैं। कहते हैं कि यह गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या हैं, जो अपने पति के श्राप के कारण पत्थर बन गई थीं। वहीं जनकपुरी में स्वयंवर में शामिल सभी राजा महाराजा भगवान शंकर से मिले धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी उनको हिला भी नहीं पाता है। आकाशवाणी के बाद लंकापति रावण भी धनुष को बिना तोड़े चले जाते हैं। किसी राजा के धनुष न तोड़े जाने पर जनक क्रोधित हो कर कहते है कि हे देश देश के राजा गण मै किसे कहूं बलशाली है। आज हमें अनुमान हुआ पृथ्वी बीरो से खाली है। राजा जनक की बातें सुनकर लक्ष्मण को क्रोध आ जाता है, जिस पर विश्वामित्र और लक्ष्मण को शांत करते हैं और रामचंद्र को धनुष तोड़ने का आदेश देते हैं। गुरु की आज्ञा से श्री रामचंद्र धनुष को तोड़ देते हैं। चारो तरफ श्री राम के जयकारे लगने लगते हैं। रामलीला आयोजन में मुख्यरूप से गप्पू सिंह, अमित सिंह, विपिन पांडेय, जयहिंद मौर्या आदि मौजूद रहे। घोसी नगर की रामलीला में बुधवार को माता सीता को कौवा रूपी जयंत के चोंच मारने का मंचन किया गया। मंचन में जयंत द्वारा कुटिलता बस सीता जी को चोंच मार कर भाग निकला। जिसकी सूचना मिलते ही राम ने जयन्त के पीछे बाण छोड़ दिया। जिससे भयभीत हो कर जयंत ने तीनों लोकों का चक्कर लगाते हुए अपनी रक्षा की गुहार लगाते हुए सभी देवताओं के पास गया। लेकिन सबने इसमें असमर्थता जताते हुए श्रीराम के चरणों में जाने को कहा। भगवान श्रीराम के पास पहुंचकर जयंत ने अपने प्राणों की भीख मांगा, जिस पर भगवान राम ने कहा कि तुम्हारा अपराध क्षमा योग्य तो नहीं, लेकिन शरण में आने के चलते प्राण ना लेेेने की बात कही। लेकिन दंडस्वरूप उसकी एक आंख जरूर फोड़ने की बात कहकर जयंत की एक आंख फोड़ देते है। जिसके पश्चात दर्शकों द्वारा जय श्री राम के नारे लगे कार्यक्रम में मुख्य रूप से अध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव,कुबेर राम मौर्य, रामधारी सोनकर ,उमेश मिश्र,वायुनंदन मिश्र, केदार सोनकर, रामचंदर निषाद, उमेश आर्य,शिवम शर्मा, शिवम पांडेय आदि मौजूद रहे।
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