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अभी भी चालीस फिसदी है शादी अनुदान से वंचित
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मऊ। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शामिल हुए लाभार्थियों में से अधिकांश को प्रोहत्साहन राशि नहीं मिल सकी है। ऐसे मेें दांपत्य में बंधने वाले जोड़ों में नाराजगी है। चालू वित्तीय वर्ष में सात ब्लाकों में 792 जोड़ों की सामूहिक शादी हुई। जिसमें 338 को अभी तक प्रोत्साहन धनराशि नहीं मिली है। एक जोड़े को 35 हजार की धनराशि दी जाती है। सपा शासनकाल में लागू शादी अनुदान योजना में गड़बड़ी होने की आशंका पर वर्तमान मुख्यमंत्री ने इसमें परिवर्तन कर दिया, ताकि खेल न किया जा सकें, साथ ही साथ पात्रों को पूरा लाभ दिया जा सकें। परिणामस्वरुप इस शादी अनुुदान योजना का नाम बदलकर उसे मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का नाम दिया गया। साथ ही नियमावली में भी फेर बदल किया गया। इसके तहत इस योजना में शामिल होने वाले प्रति जोड़ों पर खर्च करने के लिए खंड विकास अधिकारी को छह हजार रुपया दिया जाता है। ताकि परिणय सूत्र में बंधने वाले जोड़ों के शादी का इंतेजाम और परिवार के सदस्यों को खाने पीने की व्यवस्था किया जा सकें। इसके अलावा प्रति जोड़े को उपहार देने के लिए दस हजार रुपया दिया जाता है। साथ ही परिणय सूत्र में बंधने वाले प्रति जोड़े को 35 हजार रुपया दिया जाता है। इस वित्तीय वर्ष में विभिन्न ब्लाकों पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सात कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें कुल 792 जोड़ों की शादी की गई। लेकिन अनुदान सिर्फ 454 को दिया जा गया है। ऐसे में 338 लाभार्थी अनुदान की धनराशि पाने के लिए भटक रहें हैँ। जिला समाज कल्याण अधिकारी विनोद यादव ने बताया कि कुछ तकनीकी खामी के चलते पात्रों के खाते में धनराशि स्थानांतरित नहीं की जा सकी है, प्रक्रिया जारी है, जल्द ही सभी के खाते में रुपया चला जाएगा। बताते चले विकास खंड कोपागंज में अंतिम वैवाहिक कार्यक्रम 7 दिसंबर 2019 को संपन्न हुआ है, इसमें कुल 36 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे थे। उससे पूर्व छह दिसंबर 2019 को घोसी विकास खंड के सरायसादी में वैवाहिक कार्यक्रम हुआ था, इसमें 40 जोड़े एक हुए थे।
नौ फरवरी 2018 को आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शामिल हुए, रतनपुरा ब्लाक के पिपरसाथ गांव निवासी अवधेश ने बताया कि उसकी पुत्री करिश्मा की शादी हुई। लेकिन आजतक धनराशि उसके खाते में नहीं आई। वह प्रधान से लेकर ब्लाक और समाज कल्याण कार्यालय तक का चक्कर लगा चुका है। लेकिन कही पर उसकी कोई सुनवाई नहीं की गई। अब वो थकहार का बैठ गया है।
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नौ फरवरी 2018 को आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शामिल हुए, रतनपुरा ब्लाक के पिपरसाथ गांव निवासी अवधेश ने बताया कि उसकी पुत्री करिश्मा की शादी हुई। लेकिन आजतक धनराशि उसके खाते में नहीं आई। वह प्रधान से लेकर ब्लाक और समाज कल्याण कार्यालय तक का चक्कर लगा चुका है। लेकिन कही पर उसकी कोई सुनवाई नहीं की गई। अब वो थकहार का बैठ गया है।
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