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पात्रों को बना दिया जा रहा अपात्र

Fri, 06 Sep 2019 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 06 Sep 2019 11:57 PM IST
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कलेक्ट्रेट पर वार्ड नंबर 13 भदेसरा के सभासद द्वारा शहरी आवास के लिए पैसा लिए जाने के बाद जिलाधिकार? - फोटो : MAU
मऊ। सरकार की तरफ से संचालित की गई योजनाओं का लाभ सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही से जनता को नहीं मिल पा रहा। सबसे ज्यादा खेल सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर है। रुपये के लालच में कर्मचारी पात्र को अपात्र तो अपात्र को पात्र बना रहे। रतनपुरा ब्लाक के सम्हरुआ गांव के प्रधान ने जहां उच्चाधिकारियों से सचिव की शिकायत कर जांच की मांग की है तो वहीं भदेसरा के लोगों ने बकायदे शपथ पत्र लगाकर डुूडा के साथ सभासद पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत 2018 -2019 के लिए तैयार की गई पात्रों की सूची में अन्य ब्लाकों की तरह रतनपुरा के समम्हरुआ गांव निवासी आठ लोगों का नाम पात्रों में था। सूची में आठ नामों में शामिल विक्रम बहादुर पुत्र स्व. देवनरायण का मकान बीते वर्ष बरसात के दौरान ढह गया था। देवनरायण के साथ-साथ सम्हरुआ गांव निवासी राम बिलास पुत्र अभय नारायण, राम गोविंद पुत्र जमुना, रामसूरज पुत्र जगरनाथ, रामआशीष पुत्र राम बड़ाई, उर्मिला देवी पत्नी स्व. कैलाश, अमरजीत पुत्र राजनाथ सहित 12 का नाम शामिल था। जांच के दौरान सचिव विवेकानंद यादव ने नौ अगस्त को अपनी रिपोर्ट आख्या में सभी को अपात्र घोषित कर दिया। जबकि इससे पूर्व तीन अगस्त 2018 को इसी सचिव ने विक्रम बहादुर का मकान गिरने और उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र बताया था। इसके बाद 19 अगस्त 2018 को सचिव ने सभी को पात्र बताते हुए प्रधान मंत्री आवास देने की आख्या रिपोर्ट प्रेषित किया था। लेकिन अचानक सभी क्यों अपात्र हो गए, इसका उत्तर सचिव विवेकानंद के पास नहीं था। पूछने पर बोले, भूल हो गई थी जिसे सुधार लिया गया है। दूसरी तरफ प्रधान ने तीन सितंबर को उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर सचिव की इस कारस्तानी की शिकायत करते हुए पात्रों की जांच किसी दूसरे ब्लाक के सचिव या अधिकारी से कराने की मांग की। साथ ही सचिव पर गंभीर आरोप लगाए। पीएम आवास का दूसरा मामला नगर क्षेत्र के भदेसरा मुहल्ले का है। इस मुहल्ले के निवासी और आवास योजना के पात्र 12 से अधिक लोग शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और डीएम को शपथपत्र के साथ ज्ञापन सौंपे। इसमें योजना के पात्रों ने सभासद के साथ डूडा के जेई और सर्वेयर पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाया। कहा प्रति आवास 21 हजार की डिमांड की जा रही है। इस दौरान किसी ने दस तो किसी ने पांच हजार रुपया दिया भी है।
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