मऊ। तमसा के तट पर मौजूद नंबरों पर मकान बनाने का सिलसिला जारी रहने से नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है, इस खेल में नगर पालिका की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि नदी की खाई को पाटने के लिए नगर पालिका वहां कूड़ा गिरा रहा। नतीजतन, खाई बन चुुकी जमीन पट जा रही और वहां आसानी से भवन बन रहे। इसके साथ ही नदी के किनारे मौजूद वानिकी और ग्रीन लैंड की जमीनों पर भी निर्माण जारी है। ऐसे में नगर पालिका प्रशासन पर अतिक्रमण कर भवन निर्माण कराने में मिलीभगत पर उंगली उठ रही।
नदी के ईद-गिर्द के अधिकांश भू भाग का नंबर ग्रीन लैंड या फिर वानिकी है, इसमें अधिकांश नंबर सही भी है। ऐसे में लोग सही नंबर की आड़ में ग्रीन लैंड में मकान का निर्माण करा रहे हैं। नदी के पाट में हो रहे निर्माण के प्रति जहां नियोजन विभाग उदासीन है, वहीं नदी के कटाव से बनी गहरी खाई को पाटने का काम नगर पालिका कर रहा है। नगर पालिका का कूड़ा इन स्थानों पर भू स्वामी से सांठ गांठ करके गिराया जाता है, इससे खाई भी पट जाती है, साथ ही साथ नगर पालिका को कूडा निस्तारण करने में सहूलियत मिलती है। तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट और वर्तमान मुख्य राजस्व अधिकारी हंसराज ने नदी के किनारे मकान बनवाने वाले 30 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किया था। बताया कि सभी मामले सुनवाई में है। बताते चले ढेकुलिया घाट से शहर की तरफ जाने वाले रोड पर बम घाट के पास तो नदी की तलहटी में शराब की दुकान संचालित है। नदी बढ़ने पर यह दुकान डूब भी गई थी। इस पर प्रशासन ने नजर डाला तो पता चला कि दुकान एक व्यक्ति के जमीन में है। उसने दुकान खोलने के लिए जमीन को किराए पर दिया है। वहीं, श्मशान घाट के बगल में तो नदी के किनारे मंदिर और मस्जिद हैं।, इसके बाद बूचड़ खाने तक दर्जन से अधिक मकानों का निर्माण किया गया है।