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आश्रय स्थलों में बेहाल हैं पशु

Sat, 28 Sep 2019 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2019 12:03 AM IST
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रतनपुरा में बनाए गए पशु अस्थाई केंद्र मैं मौजूद पशु - फोटो : MAU
मऊ। प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण निराश्रित पशु आश्रय स्थल योजना के तहत जनपद में कुल 24 आश्रय स्थल खोले गए हैं। इनमें 1159 गोवंश रखे गए हैं। नगर पालिका सहित जिले की सभी नौ न्याय पंचायतों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 14 पशु आश्रय स्थलों का निर्माण किया गया है। छोटी दीवारों तथा केवल लोहे की पाइप और एंगिल के सहारे लगाए गए टीन शेड के नीचे इन्हें रखा गया है। कई केंद्रों की तो चहारदीवारी भी नहीं है। इनमें रखे गए पशुओं को भर पेट भोजन नहीं दिया जाता है। इसके चलते कई केंद्रों पर काफी पशु मर चुके हैं। नगर पालिका क्षेत्र के ढेकुलियाघाट पर पर पशु आश्रय स्थल में 68 पशु रखे गए हैं। घोसी में बड़ागांव मछली हट्टा में टीन शेड में केवल 15 गोवंश हैं इनमें दो बछिया और 15 बछडे हैं। परदहां ब्लाक क्षेत्र के रणवीरपुर गांव स्थित अस्थाई पशु आश्रय केंद्र का निर्माण फरवरी 2019 में ग्राम सभा की एक एकड़ भूमि में कराया गया है। शुरूआती समय में गौशाला के अंदर 100 के करीब पशु थे लेकिन वर्तमान समय में गौशाला में 220 पशु हैं। रतनपुरा में पशु आश्रय केंद्र पर 188 पशु रखे गए हैं। जिनमें अब तक 14 पशुओं की मौत हो चुकी है। खुले आसमान के नीचे आज लगातार तीन दिनों हो रही इन बारिश से लगभग एक फुट पानी में पशु खड़े हैं। दुर्व्यस्था के चलते यहां कार्यरत पांच सफाई कर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। फिर भी कोई सुधार नहीं है। मधुबन नगर पंचायत के पांती रोड स्थित जल निगम में बने पशु आश्रम स्थल में केवल 20 पशु हैं। सभासद लाल बहादुर मल्ल ने चारे के लिए चार मंडा जमीन नगर पंचायत को दिया है। रानीपुर ब्लाक के मिर्जापुर में 107 पशु हैं। एक सप्ताह से बिजली न होने से सबमर्सिबल पंप नहीं चल पा रहा है। इससे पशुओं को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा। नगर पंचायत वलीदपुर में 22 पशु रखे गए हैं। एक ही नाद में कई पशुओं को बांध कर खानापूरी की जा रही है। फतेहपुर मंडाव ब्लाक के कुतुबपुर धनोवा और केशवपुर सुलतानीपुर में बने आश्रय स्थलों में क्रमश: 60 और 55 पशु रखे गए हैं। यहां पर पहले पांच पशुओं की मौत हो चुकी है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. भगवान सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत इन आश्रय स्थलों से चार चार पशु किसानों को पालने के लिए दिए जा रहे हैं। किसान इन केंद्रों से पहली जुलाई पूर्व पंजीकृत टैग लगे पशुओं को ले जाकर अपने घर पाल सकते हैं।इससे खाली होने आश्रय स्थलों में फिर छुट्टा जानवरों को रखा जा सकेगा।
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