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एनबीएआईएम ने शुरू की विलक्षण परियोजना

Wed, 30 Oct 2019 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 30 Oct 2019 11:51 PM IST
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mau news agriculture
परदहां ब्लाक के कुशमौर स्थित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो में किसानों को कृषि संबधि? - फोटो : MAU
बढुआगोदाम। जिले के किसानों को सूक्ष्मजीव आधारित जैविक कृषि के प्रसार और उससे जुड़ी बारीकियों के विषय में व्यापक जागरूकता लाने और खेती, मिट्टी और पर्यावरण के हित में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर एक अनोखी, विलक्षण और प्रभावशाली परियोजना क्षेत्र के कुशमौर स्थित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो में प्रारंभ की गई है। इस परियोजना के मूल में स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ फसलें, स्वस्थ मानव जैसी अवधारणा है जो लंबे समय तक प्रभावी और टिकाऊ कृषि तंत्र पर आधारित है। किसान के खेतों में मिट्टी के जैविक घटकों का संपोषण एक महती आवश्यकता है जिससे मिट्टी पोषक तत्वों की सतत चक्रीय प्रणाली का पालन करते हुए फसली पौधों को सम्यक मात्रा में न्यूट्रीएंट और मिनरल तत्वों को उपलब्ध करने में सक्षम हो. ऐसी व्यवस्था से उपज बढाने के साथ ही साथ मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रखने में किसानों को सुविधा होगी। वर्तमान में दोहन प्रणाली पर आधारित कृषि के माध्यम से किसान अपने खेतों की मिट्टी से अधिक से अधिक पोषक तत्व खींच ले रहे हैं और पौधों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बदले में रासायनिक विकल्पों पर जोर दे रहे हैं जो मिट्टी की पारिस्थितिकी में असंतुलन पैदा कर रहा है। ऐसे में किसानों को इस प्रकार की खेती से उपजी समस्याओं के विषय प्रभावी ढंग से बताने, उनसे विकल्पों के बारे में परस्पर संवाद बढाने, उनमें कृषिगत वैज्ञानिक अभिरुचियों को जागृत करने और %इंटरैक्टिव लर्निंग% के माध्यम से किसानों को मिट्टी और पर्यावरण के स्वास्थ्य-रक्षण की विधियों, तकनीकियों और प्रौद्योगिकियों के विषय में प्रशिक्षित करने से धीरे धीरे इन समस्याओं के निदान में सहायता मिल सकती है। इस संबंध में एनबीएआईएम के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी. पी. सिंह ने बताया कि वर्तमान में खेतों की मिट्टी से जुड़ी किसानों की कई ऐसी समस्याओं हैं जिनके सम्यक निदान से न केवल खेती की लागत में कमी लाई जा सकती है बल्कि मिट्टी के उपजाऊपन में भी उत्तरोत्तर सुधार लाया जा सकता है।
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