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मऊः गांवों में नहीं हो रहे विकास कार्य, भुगतान भी लटका
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मऊ जनपद में बीते वर्ष दिसंबर में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद ब्लाक स्तर पर एडीओ पंचायत प्रशासक के रूप में तैनात किए गए हैं लेकिन गांवों कोई विकास कार्य नहीं हो रहा है। राज्य वित्त और चौदहवें वित्त के खाते में धन होने के बाद भी गांवों में कोई नया कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। यहां तक कि कार्यकाल के आखिरी चरण में ग्राम प्रधानों की ओर से कराए गए कार्यों का भुगतान भी तीन महीने लटका पड़ा है।
परदहा ब्लाक के ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने परदहां ब्लाक में एडीओ स्तर के अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया ताकि गांवों के विकास कार्य बाधित न हों। लेकिन तीन महीने बाद भी ब्लाक के सभी पंचायतों में राज्य वित्त और चौदहवें वित्त के तहत अभी तक कोई नया कार्य भी नहीं किया गया है। कार्यकाल के आखिरी चरण में प्रधानों ने सार्वजनिक शौचालय, पंचायत भवन, कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराए। तीन महीने बीतने के बाद भी अब तक भुगतान अधर में लटका हुआ। ऐसे में परदहां ब्लाक की 51 ग्राम पंचायतों के विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव के बदले आरक्षण नीति और हार जीत के फैसलों से पुराने प्रधानों की वापसी बाधित हो सकती है। ऐसी स्थिति में पुराने किए गए कार्यों के भुगतान को लेकर नए और पुराने प्रधान में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। डीपीआरओ घनश्याम सागर ने कहा कि मानक केे अनुसार कराए गए कार्यों का भुगतान किया जा रहा है।
मतदान केंद्रों पर बिजली, पानी की जिम्मेदारी सचिव की
बढुआ गोदाम। त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव में जिला प्रशासन की ओर से सभी मतदान केंद्रों पर बिजली, पानी और मरम्मत आदि की जिम्मेदारी गांव के सचिव को दी गई है। जबकि कार्यों का भुगतान नहीं होने की स्थिति में मतदान केंद्रों पर सुविधाओं को मुहैया करना कठिन साबित हो रहा है।
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परदहा ब्लाक के ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने परदहां ब्लाक में एडीओ स्तर के अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया ताकि गांवों के विकास कार्य बाधित न हों। लेकिन तीन महीने बाद भी ब्लाक के सभी पंचायतों में राज्य वित्त और चौदहवें वित्त के तहत अभी तक कोई नया कार्य भी नहीं किया गया है। कार्यकाल के आखिरी चरण में प्रधानों ने सार्वजनिक शौचालय, पंचायत भवन, कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराए। तीन महीने बीतने के बाद भी अब तक भुगतान अधर में लटका हुआ। ऐसे में परदहां ब्लाक की 51 ग्राम पंचायतों के विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव के बदले आरक्षण नीति और हार जीत के फैसलों से पुराने प्रधानों की वापसी बाधित हो सकती है। ऐसी स्थिति में पुराने किए गए कार्यों के भुगतान को लेकर नए और पुराने प्रधान में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। डीपीआरओ घनश्याम सागर ने कहा कि मानक केे अनुसार कराए गए कार्यों का भुगतान किया जा रहा है।
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मतदान केंद्रों पर बिजली, पानी की जिम्मेदारी सचिव की
बढुआ गोदाम। त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव में जिला प्रशासन की ओर से सभी मतदान केंद्रों पर बिजली, पानी और मरम्मत आदि की जिम्मेदारी गांव के सचिव को दी गई है। जबकि कार्यों का भुगतान नहीं होने की स्थिति में मतदान केंद्रों पर सुविधाओं को मुहैया करना कठिन साबित हो रहा है।
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