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शहीद गणेश यादव का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन
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चकरा गांव में शहीद गणेश यादव को श्रद्वांजलि अर्पित करते वनमंत्री दारा सिंह चौहान।
- फोटो : MAU
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इंदारा। कश्मीर के लेह में देश की सेवा में प्राण न्यौछावर करने वाले सेना के जवान हलधरपुर थाना क्षेत्र के चकरा गांव निवासी गणेश यादव का पार्थिव शरीर शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे उनके घर पहुंचा तो परिवार सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मंत्री दारा सिंह चौहान, जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल और पुलिस अधीक्षक सुशील घुले सहित नेताओं और नागरिकों ने शहीद को नमन किया। मंत्री ने शहीद के परिवारीजनों को 50 लाख रुपये का चेक सौंपा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया। शाम सरयू तट के श्मशान घाट मुक्तिधाम पर शहीद के पार्थिव शरीर को एक तख्ते पर रखा गया। सेना की टुकड़ी ने शहीद को अंतिम सलामी दी। पिता विश्वनाथ यादव ने शहीद बेटे का मुखाग्नि दी तो गणेश सिंह अमर रहे के नारों से इलाका गूंज उठा। इस दौरान सभी की आखें भरभरा आईं।
तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर शनिवार को पैतृक गांव में लगभग 11 बजे पहुंचा तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। परिवार के लोग रोने-बिलखने लगे। पूरे इलाके में गणेश यादव अमर रहें का नारा गूंजने लगा। लोगों ने अपने सपूत की शहादत को नमन किया। इस दौरान घर पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहीद के पार्थिव शरीर को डीएम-एसपी सहित तमाम आलाधिकारी अपने कंधे पर लेकर घर पहुंचे। मंत्री दारा सिंह चौहान शहीद के घर पहुंचे। सरकार की तरफ से 50 लाख का चेक दिया। साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और शहीद के नाम पर सड़क बनाने का भरोसा दिया। इस दौरान मौजूद भीड़ ने भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। उधर गांव वाले गणेश यादव के घर पहुंच कर परिवार को सांत्वना दे रहे थे। गांव वालोें ने कहा उनके यहां के लाल ने लेह जैसे दुर्गम इलाके में रहते हुए देश की सीमा की सुरक्षा करते हुये प्राण न्यौछावर कर दिया। यह पूरे गांव और जिले के लिए गौरवान्वित करने वाला है।
दोपहर बाद शहीद गणेश यादव की अंतिम यात्रा निकली तो जनसैलाब उमड़ पड़ा। सभी की आंखें नम थीं। इस दौरान हजारों लोग भारत माता की जय हो, गणेश भैया अमर रहे के नारे लगाते हुए चल रहे थे। मुक्तिधाम पर शहीद के शव को एक तख्ते पर रखा गया तथा सेना की टुकड़ी ने शहीद को अंतिम सलामी दी। शहीद के शव को उनके पिता विश्वनाथ यादव ने मुखाग्नि दी। शहीद के दोनों मासूम बच्चे उजाला और आकाश की आंखों से अश्रुधारा बहती रही। इस दौरान श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में ब्लाक प्रमुख सुजीत सिंह, सपा जिलाध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव ,पूर्व विधायक सुधाकर सिंह, पूर्व एमएलसी राम जतन राजभर, पूर्व विधायक बैजनाथ पासवान,पूर्व सपा जिलाध्यक्ष शैंलेेंद यादव साधू ,महासचिव कुद्दूस अंसारी अल्ताफ अंसारी, उपजिलाधिकारी सदर निरंकार सिंह,सीओ घोसी धनंजय मिश्र ,कोतवाल कुमुद शेखर सिंह, पंकज मद्धेशिया ,विशाल यादव, अजय राय, राजेश राय, क्षेत्र पंचायत सदस्य रमाकांत, संजय यादव ,शिवचन्द समेत आदि लोग काफी लोग रहे ।
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बिलखते बेटे और बेटी ने कहा, पापा कहते थे अच्छा इंसान बनना
गणेश यादव 2002 में आर्मी के 285 मीडियम रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। इन दिनों उनकी तैनाती लेह में थी। गणेश यादव की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से हुई। हाइस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पब्बर इंटर कालेज औराई कला बलिया से की थी। गणेश की माता का निधन चार वर्ष पहले ही हो चुका है। उनका एक भाई मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता है। गणेश के पिता विश्वनाथ यादव किसान हैं। शहीद गणेश के पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। गणेश की एक बेटी उजाला 12 वर्ष और बेटा आकाश नौ वर्ष का है। गणेश के बेटे आकाश और बेटी उजाला ने बिलखते हुए बताया कि पापा हम लोगों को एक अच्छा इंसान बनने के लिए बोलते थे। वहीं शहीद की पत्नी तारा देवी व बेटी रोते-रोते बेहोश हो जा रहीं थीं। परिवारवाले उन्हें किसी तरह संभालने में लगे रहे।
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तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर शनिवार को पैतृक गांव में लगभग 11 बजे पहुंचा तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। परिवार के लोग रोने-बिलखने लगे। पूरे इलाके में गणेश यादव अमर रहें का नारा गूंजने लगा। लोगों ने अपने सपूत की शहादत को नमन किया। इस दौरान घर पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहीद के पार्थिव शरीर को डीएम-एसपी सहित तमाम आलाधिकारी अपने कंधे पर लेकर घर पहुंचे। मंत्री दारा सिंह चौहान शहीद के घर पहुंचे। सरकार की तरफ से 50 लाख का चेक दिया। साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और शहीद के नाम पर सड़क बनाने का भरोसा दिया। इस दौरान मौजूद भीड़ ने भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। उधर गांव वाले गणेश यादव के घर पहुंच कर परिवार को सांत्वना दे रहे थे। गांव वालोें ने कहा उनके यहां के लाल ने लेह जैसे दुर्गम इलाके में रहते हुए देश की सीमा की सुरक्षा करते हुये प्राण न्यौछावर कर दिया। यह पूरे गांव और जिले के लिए गौरवान्वित करने वाला है।
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दोपहर बाद शहीद गणेश यादव की अंतिम यात्रा निकली तो जनसैलाब उमड़ पड़ा। सभी की आंखें नम थीं। इस दौरान हजारों लोग भारत माता की जय हो, गणेश भैया अमर रहे के नारे लगाते हुए चल रहे थे। मुक्तिधाम पर शहीद के शव को एक तख्ते पर रखा गया तथा सेना की टुकड़ी ने शहीद को अंतिम सलामी दी। शहीद के शव को उनके पिता विश्वनाथ यादव ने मुखाग्नि दी। शहीद के दोनों मासूम बच्चे उजाला और आकाश की आंखों से अश्रुधारा बहती रही। इस दौरान श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में ब्लाक प्रमुख सुजीत सिंह, सपा जिलाध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव ,पूर्व विधायक सुधाकर सिंह, पूर्व एमएलसी राम जतन राजभर, पूर्व विधायक बैजनाथ पासवान,पूर्व सपा जिलाध्यक्ष शैंलेेंद यादव साधू ,महासचिव कुद्दूस अंसारी अल्ताफ अंसारी, उपजिलाधिकारी सदर निरंकार सिंह,सीओ घोसी धनंजय मिश्र ,कोतवाल कुमुद शेखर सिंह, पंकज मद्धेशिया ,विशाल यादव, अजय राय, राजेश राय, क्षेत्र पंचायत सदस्य रमाकांत, संजय यादव ,शिवचन्द समेत आदि लोग काफी लोग रहे ।
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बिलखते बेटे और बेटी ने कहा, पापा कहते थे अच्छा इंसान बनना
गणेश यादव 2002 में आर्मी के 285 मीडियम रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। इन दिनों उनकी तैनाती लेह में थी। गणेश यादव की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से हुई। हाइस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पब्बर इंटर कालेज औराई कला बलिया से की थी। गणेश की माता का निधन चार वर्ष पहले ही हो चुका है। उनका एक भाई मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता है। गणेश के पिता विश्वनाथ यादव किसान हैं। शहीद गणेश के पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। गणेश की एक बेटी उजाला 12 वर्ष और बेटा आकाश नौ वर्ष का है। गणेश के बेटे आकाश और बेटी उजाला ने बिलखते हुए बताया कि पापा हम लोगों को एक अच्छा इंसान बनने के लिए बोलते थे। वहीं शहीद की पत्नी तारा देवी व बेटी रोते-रोते बेहोश हो जा रहीं थीं। परिवारवाले उन्हें किसी तरह संभालने में लगे रहे।