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Mau News: बसाने के समय दावे-वादे खूब किए, अब बस्तियों में सुविधाएं ढूंढ़ रहे कटान पीड़ित

Fri, 02 Oct 2026 11:55 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 11:55 PM IST
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Many promises were made at the time of resettlement; now
दुबारी के लक्ष्मीपुर में आवंटित जमीन पर मड़ई में बैठे एक परिवार के सदस्य। संवाद पड़ताल की ख
दुबारी। पांच साल में मधुबन तहसील क्षेत्र की 314 जगहों पर कटान पीड़ितों को बसाने के समय तहसील प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने खूब दावे-वादे किए थे। लेकिन अब तक इन बस्तियों तक जाने के लिए पक्की सड़क नहीं बन सकी है। जलनिकासी के लिए नाली निर्माण भी नहीं हुआ और न ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हो पाई है। इनमें करीब 25 लोगों के अलावा सभी पक्की छत का इंतजार कर रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के लिए पीड़ित दर्जनों बार लिखित शिकायत कर चुके हैं और कई बार विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
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शुक्रवार को हमारी टीम ने इन 14 जगहों पर पहुंचकर कटान पीड़ितों की बस्तियों की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। कटान पीड़ित बलकेसिया, रामजी, कल्लन आदि ने बताया कि जमीन तो मिल गई, लेकिन यहां अब भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। न तो जलनिकासी की सुविधा है और न ही पेयजल के लिए हैंडपंप लगे हैं। लोकसभा चुनाव-2024 के दौरान कटान पीड़ितों ने अपने-अपने दरवाजे पर चुनाव बहिष्कार की तख्तियां लटकाई थीं। वहां प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहुंचकर मान-मनौव्वल किए।
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मधुबन तहसील के धर्मपुर बिशुनपुर ग्राम पंचायत के बिंटोलिया और नई बस्ती के करीब 314 लोगों का आशियाना 2020 से 2025 तक सरयू नदी में आई बाढ़ में समा गया था। इसके बाद प्रशासन ने 14 जगहों पर इन कटान पीड़ितों को जमीन आवंटित कर बसाया। इसमें लक्ष्मीपुर के दो पुरवा में 28 कटान पीड़ित, गोबरही के दो पुरवा में 59, मझौवा के तीन पुरवा में 51, सुवाह में 18, कविराजपुर में 15, भैरोपुर में 34, हैबतपुर में एक पुरवा, रामपुर कामना में 10 और कलनापार में 16 कटान पीड़ित बीते पांच वर्ष से आवंटित जमीन पर मड़ई बनाकर रह रहे हैं।
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चुनाव बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन के बाद बस्ती में केवल बिजली के पोल लगाए गए थे। इससे अंधेरे से छुटकारा मिला, लेकिन रहने के लिए पक्की छत नहीं मिली। - सुभावती, कटान पीड़ित
घर और खेती की जमीन बाढ़ में कटने के बाद प्रशासन ने जमीन आवंटित की, लेकिन अब तक मालिकाना हक दिखा सकें, इसके लिए कागज नहीं दिया गया है। मुख्यमंत्री आवास के लिए आवेदन करने के बाद भी सूची में नाम नहीं आया। - प्रभावती, कटान पीड़ित
पक्की सड़क और जलनिकासी की सुविधा नहीं है। बारिश होने पर मड़ई में पानी घुस जाता है और ऊपर से टपकता है। ऐसे में भोजन बनाने के लिए घर की महिलाओं को बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ता है। - विपिन, कटान पीड़ित
भविष्य में जमीन को लेकर कोई विवाद न हो, इसके लिए उन्हें आवंटन पत्र और जमीन के दस्तावेज दिए जाने जरूरी हैं। बिना कागजात के वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। - सुरेश कुमार, कटान पीड़ित:


14 जगह जमीन आवंटित कर बसाए गए कटान पीड़ितों को हर सुविधा और आवंटन पत्र उपलब्ध कराने के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में उन इलाकों के लेखपालों की टीम गठित की गई है। जांच और सर्वे करके सभी के लिए मुख्यमंत्री आवास का भी लाभ दिलाया जाएगा। जिन बस्तियों में पानी घुस जाता है, उनके लिए ऊंचा स्थान देखकर विस्थापित कराया जाएगा। - दीपक सिंह, उपजिलाधिकारी, मधुबन
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