कोपागंज। नगर पंचायत के सरस्वती शिशु मंदिर के प्रांगण में चल रहे साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को मुंबई से आये महाराज आचार्य स्वामी रविंद्र ने कहा कि जो व्यक्ति संस्कार युक्त जीवन जीता है वह जीवन में कभी कष्ट नहीं पा सकता। उन्होंने अपने प्रवचन के दौरान रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुर जी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भवसागर से पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उद्धव गोपी संवाद, उद्धव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। स्वामी जी ने कहा कि जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते हैं।कहा कि रास का तात्पर्य परमानंद की प्राप्ति है। जिसमें दु:ख,शोक आदि से सदैव के लिए निवृत्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण रूक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को आनंदित किया। उधर, खुखुंदवा में श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य गंगाचार्य महाराज ने कहा कि कलियुग में प्रभु नाम सुमिरन ही श्रेष्ठ है। भगवान का नाम जपने से ही यज्ञ हवन पूजन का फल प्राप्त होता है। कहा कि ईश्वर के प्रति अटल विश्वास का नाम ध्रुव है। भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानने वाले भक्त प्रहलाद को उनकी समर्पित भक्ति एवं विश्वास ने खंभे में भगवान के दर्शन करा दिए।