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सारी स्मृतियों को सहेजता है साहित्य
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Tue, 26 Sep 2017 11:29 PM IST
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डा.विमलेश सिंह और डा.रामनिवास राय को सम्मानित करते लोग।
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पूर्वांचल साहित्य कला परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को हिंदी भवन के सभागार में डॉ. रामप्यारे तिवारी स्मृति समारोह और काव्य गोष्ठी आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर विमलेश मिश्र और डीसीएसके पीजी कॉलेज के डा. राम निवास राय को कार्यक्रम संयोजक मृत्युंजय तिवारी और पं. दयाशंकर तिवारी ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया ।
मुख्य अतिथि विमलेश मिश्र ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास की पात्र बुधिया के प्रसव पीड़ा की वेदना की चर्चा करते हुए करते हुए कहा कि यह लोग देख रहे थे लेकिन प्रेम चंद्र बुधिया की प्रसव पीड़ा को पकड लेते हैं मगर आज का रचनाकार इस वेदना को क्यों नहीं पकड़ पाता है।
डा. राम प्यारे तिवारी का काव्य संग्रह आज के परिवेश में प्रासंगिक लगता है। विशिष्ट अतिथि डा. प्रकाश उदय ने कहा कि साहित्य हमारी स्मृतियों को सहेजता है। कंचनलता पांडेय , डा. सर्वेश पांडेय , डा. राम निवास राय ने अपने विचार व्यक्त किए। दूसरे सत्र में गजल गायक बृजेश सिंह, डा. कंचन राय , कमलेश राय, सीपी राय, जगदीश सिंह , रबीस कुमार , आदि ने कविताएं प्रस्तुत कीं।
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मुख्य अतिथि विमलेश मिश्र ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास की पात्र बुधिया के प्रसव पीड़ा की वेदना की चर्चा करते हुए करते हुए कहा कि यह लोग देख रहे थे लेकिन प्रेम चंद्र बुधिया की प्रसव पीड़ा को पकड लेते हैं मगर आज का रचनाकार इस वेदना को क्यों नहीं पकड़ पाता है।
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डा. राम प्यारे तिवारी का काव्य संग्रह आज के परिवेश में प्रासंगिक लगता है। विशिष्ट अतिथि डा. प्रकाश उदय ने कहा कि साहित्य हमारी स्मृतियों को सहेजता है। कंचनलता पांडेय , डा. सर्वेश पांडेय , डा. राम निवास राय ने अपने विचार व्यक्त किए। दूसरे सत्र में गजल गायक बृजेश सिंह, डा. कंचन राय , कमलेश राय, सीपी राय, जगदीश सिंह , रबीस कुमार , आदि ने कविताएं प्रस्तुत कीं।
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