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साहित्य समाज के नैतिक और सांस्कृतिक विकास का आधार : प्रो. संजीव कुमार
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देवश्री न्यास की तरफ से नगर स्थित डीसीएसकेपीजी. कॉलेज के सभागार में शनिवार की शाम दो दिवसीय अखिल भारतीय साहित्य कला संगम–2026 के प्रथम दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य के कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए ‘देव श्री साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि उन्हें अंगवस्त्रम, स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह का विशेष आकर्षण रहा। मुख्य अतिथि ने कहा कि साहित्य समाज के नैतिक और सांस्कृतिक विकास का आधार है। कविता के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता, समरसता और सकारात्मक परिवर्तन की चेतना जागृत होती है।
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उन्होंने ऐसे आयोजनों को ज्ञान और सृजन की परंपरा को सुदृढ़ करने वाला बताया।कवि सम्मेलन में विभिन्न जनपदों से पधारे डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ. कलीम कैसर, डॉ. चेतना पांडेय, रामायण धर द्विवेदी आदि कवियों की रचना पर खूब ताली बजी।
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मुख्य अतिथि महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य के कवि डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए ‘देव श्री साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
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मुख्य अतिथि उन्हें अंगवस्त्रम, स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह का विशेष आकर्षण रहा। मुख्य अतिथि ने कहा कि साहित्य समाज के नैतिक और सांस्कृतिक विकास का आधार है। कविता के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता, समरसता और सकारात्मक परिवर्तन की चेतना जागृत होती है।
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उन्होंने ऐसे आयोजनों को ज्ञान और सृजन की परंपरा को सुदृढ़ करने वाला बताया।कवि सम्मेलन में विभिन्न जनपदों से पधारे डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ. कलीम कैसर, डॉ. चेतना पांडेय, रामायण धर द्विवेदी आदि कवियों की रचना पर खूब ताली बजी।