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Mau News: जहर देकर हत्या के 13 साल पुराने मामले में उम्रकैद
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मऊ। विशेष जज पॉक्सो एक्ट जनार्दन प्रसाद यादव ने 13 साल पुराने जहर पिलाकर हत्या साक्ष्य मिटाने के मामले में नामजद अरुण कुमार मौर्य को दोषी करार देेते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना न देने पर 2 वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। वहीं जुर्माने की धनराशि मृतक की पत्नी को देना होगा।
मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है। जमालपुर निवासिनी गायत्री की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। फरीदपुर गांव निवासी अरुण कुमार मौर्य को नामजद किया। पीड़िता का आरोप है कि 16 अगस्त 2012 की शाम 7 बजे आरोपी पति इंद्र मोहन चौहान को अपने साथ ले गया और रोडवेज के पास अशोक होटल मुहल्ला जलालपुर मुहम्मदाबाद गोहना में जहर पिला दिया। तबियत बिगड़ने पर छोड़कर फरार हो गया। पति को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान बीएचयू में 17 अगस्त 2012 मृत्यु हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक 12 गवाहों को पेश किया। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। विशेष जज ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अरुण कुमार मौर्य को हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी पाया। दोषी को साक्ष्य मिटाने के मामले में 5 वर्ष की सजा के साथी ही 5 हजार रुपये जुर्माने की अलग से सजा दी। जुर्माना न देने पर 6 महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। गवाहों को कोर्ट में पेश कराने में पैरवीकार आरक्षी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है। जमालपुर निवासिनी गायत्री की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। फरीदपुर गांव निवासी अरुण कुमार मौर्य को नामजद किया। पीड़िता का आरोप है कि 16 अगस्त 2012 की शाम 7 बजे आरोपी पति इंद्र मोहन चौहान को अपने साथ ले गया और रोडवेज के पास अशोक होटल मुहल्ला जलालपुर मुहम्मदाबाद गोहना में जहर पिला दिया। तबियत बिगड़ने पर छोड़कर फरार हो गया। पति को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान बीएचयू में 17 अगस्त 2012 मृत्यु हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक 12 गवाहों को पेश किया। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। विशेष जज ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अरुण कुमार मौर्य को हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी पाया। दोषी को साक्ष्य मिटाने के मामले में 5 वर्ष की सजा के साथी ही 5 हजार रुपये जुर्माने की अलग से सजा दी। जुर्माना न देने पर 6 महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। गवाहों को कोर्ट में पेश कराने में पैरवीकार आरक्षी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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