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सही चुनाव से दें सूखे को मात
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Wed, 17 Feb 2016 12:05 AM IST
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बीज अनुसंधान निदेशालय का स्थापना दिवस मंगलवार को मनाया। इस अवसर पर निदेशालाय में कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. बीएन सिंह, भूतपूर्व निदेशक, भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक, अनुसंधान निदेषक, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, राॅंची ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि की स्थिति पर चर्चा करते हुए सूखाग्रस्त एवं बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के लिए विभिन्न फसलों के उपयुक्त किस्मों के बारे में किसानों को जानकारी प्रदान की।
उन्होंने कृषकों से गेहूं में जीरो टिलेज पद्धति को अपनाने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित निदेशक एनबीआईएम डाॅ. एके सक्सेना ने किसानों को संबोधित करते हुए सूक्ष्मजीवों के महत्व एवं उपयोग के बारे में बताया।
उन्होनें सूक्ष्मजीवी जैविक खाद उत्पादों से होने वाले लाभ एवं रासायनिक खाद के कम उपयोग पर जोर दिया तथा किसानों को भविष्य में ब्यूरो की ओर से जैव उत्पादों को उपलब्ध कराने के लिए आश्वासन दिया।
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बीज अनुसंधान निदेशालय के परियोजना निदेषक डाॅ. एस. राजेन्द्र प्रसाद ने अपने संबोधिन में निदेशालय में चलाई जा रही कृषक कल्याण योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए विगत वर्षों में प्राप्त की गई उपलब्धियों के बारे में चर्चा की।
परियोजना निदेषक ने कहा कि वर्तमान वर्ष अंतरराष्ट्रीय दलहन वर्ष घोषित किया गया है अत: दलहनी फसलों के उत्पादन पर अधिक जोर देने की आवष्यकता है। कार्यक्रम के अंत में डाॅ. अरविन्द नाथ सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया। इस दौरान वैज्ञानिक एवं किसान उपस्थित रहे।
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उन्होंने कृषकों से गेहूं में जीरो टिलेज पद्धति को अपनाने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित निदेशक एनबीआईएम डाॅ. एके सक्सेना ने किसानों को संबोधित करते हुए सूक्ष्मजीवों के महत्व एवं उपयोग के बारे में बताया।
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उन्होनें सूक्ष्मजीवी जैविक खाद उत्पादों से होने वाले लाभ एवं रासायनिक खाद के कम उपयोग पर जोर दिया तथा किसानों को भविष्य में ब्यूरो की ओर से जैव उत्पादों को उपलब्ध कराने के लिए आश्वासन दिया।
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बीज अनुसंधान निदेशालय के परियोजना निदेषक डाॅ. एस. राजेन्द्र प्रसाद ने अपने संबोधिन में निदेशालय में चलाई जा रही कृषक कल्याण योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए विगत वर्षों में प्राप्त की गई उपलब्धियों के बारे में चर्चा की।
परियोजना निदेषक ने कहा कि वर्तमान वर्ष अंतरराष्ट्रीय दलहन वर्ष घोषित किया गया है अत: दलहनी फसलों के उत्पादन पर अधिक जोर देने की आवष्यकता है। कार्यक्रम के अंत में डाॅ. अरविन्द नाथ सिंह ने सभी का आभार प्रकट किया। इस दौरान वैज्ञानिक एवं किसान उपस्थित रहे।