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Mau News: दुनिया की संस्कृतियों को जोड़ने का प्रमुख माध्यम है भाषा
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मधुबन।तहसील क्षेत्र के इंदिरा गांधी पीजी कॉलेज डुमरी मर्यादपुर में बीते शनिवार को अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ।मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर सर्वोदय पीजी कॉलेज की प्राचार्या प्रो. वंदना पांडेय ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
वंदना पांडेय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भाषा संवाद का एक ज़रिया व संस्कृति का पोषक है।भाषा दुनिया की सभी संस्कृतियों को जोड़ने का प्रमुख माध्यम है।जैसे भारतीय बच्चों में सिंड्रेला के जूते या रुपेंज़ल के सुनहरे बालों को लेकर कौतुहल होता है।वैसे ही पाश्चात्य देशों के लिए पंचतत्र की कहानियां, राम, कृष्ण और अर्जुन कौतुहल पैदा करते हैं।हमारी कहानियां दुनिया तक और दुनिया की कहानियां हम तक आसानी से पहुंच पाती हैं।क्योंकि हमारे पास अनुवाद की ताकत है।एक भाषा को दूसरी भाषा में प्रेषित कर पाने की यह अद्भुत कला जिसे हम अनुवाद कहते हैं, वास्तव में दूरियां मिटाने का कार्य करती हैं।दिलों को मिलाने का कार्य करती हैं।प्रोफेसर राम शर्मा ने कहा कि रूसी लेखक चेखोव भारत में पसंद किए जाते हैं और भारत के रविंद्रनाथ टैगोर विदेशों में।विदेशी फिल्म का किरदार हैरी पॉर्टर हमारे बच्चों में मशहूर है, और हमारा बाल हनुमान विदेशों में।प्रोफेसर जयेेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि अनुवाद आज के भाषा व साहित्य के लिए अनिवार्य है।संस्कृत भाषा से अन्य भाषाओ का जन्म हुआ है। जिसके कारण संस्कृत हमारी जननी भाषा है।इस अवसर पर डा. मुहम्मद खालिद, निदेशक डा. वाईपी सिंह, निकिता पाठक, डा. सत्यनारायण तिवारी, डा. मोबिन अहमद, याज्ञवेंद्र यादव, तवस्सुम अली, सीमा सिंह, पूनम सिंह, इरफान खान आदि लोग उपस्थित रहे।
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वंदना पांडेय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भाषा संवाद का एक ज़रिया व संस्कृति का पोषक है।भाषा दुनिया की सभी संस्कृतियों को जोड़ने का प्रमुख माध्यम है।जैसे भारतीय बच्चों में सिंड्रेला के जूते या रुपेंज़ल के सुनहरे बालों को लेकर कौतुहल होता है।वैसे ही पाश्चात्य देशों के लिए पंचतत्र की कहानियां, राम, कृष्ण और अर्जुन कौतुहल पैदा करते हैं।हमारी कहानियां दुनिया तक और दुनिया की कहानियां हम तक आसानी से पहुंच पाती हैं।क्योंकि हमारे पास अनुवाद की ताकत है।एक भाषा को दूसरी भाषा में प्रेषित कर पाने की यह अद्भुत कला जिसे हम अनुवाद कहते हैं, वास्तव में दूरियां मिटाने का कार्य करती हैं।दिलों को मिलाने का कार्य करती हैं।प्रोफेसर राम शर्मा ने कहा कि रूसी लेखक चेखोव भारत में पसंद किए जाते हैं और भारत के रविंद्रनाथ टैगोर विदेशों में।विदेशी फिल्म का किरदार हैरी पॉर्टर हमारे बच्चों में मशहूर है, और हमारा बाल हनुमान विदेशों में।प्रोफेसर जयेेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि अनुवाद आज के भाषा व साहित्य के लिए अनिवार्य है।संस्कृत भाषा से अन्य भाषाओ का जन्म हुआ है। जिसके कारण संस्कृत हमारी जननी भाषा है।इस अवसर पर डा. मुहम्मद खालिद, निदेशक डा. वाईपी सिंह, निकिता पाठक, डा. सत्यनारायण तिवारी, डा. मोबिन अहमद, याज्ञवेंद्र यादव, तवस्सुम अली, सीमा सिंह, पूनम सिंह, इरफान खान आदि लोग उपस्थित रहे।
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