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खुरहट पीएचसी लाइव: जर्जर भवन में बारबिश के बीच इलाज करते मिला चिकित्सक
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रानीपुर (मऊ)। कोरोना संक्रमण की इस विषम परिस्थिति में भी जिले में कुछ चिकित्सक अपने कार्य को हर समस्याओं पर को दरकिनार करते हुए प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका उदाहरण शुक्रवार को अमर उजाला की टीम को खुरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लाइव कवरेज के दौरान देखने को मिला। जहां तीन दशक से ज्यादा समय पहले बने तथा वर्तमान में बदहाल पीएचसी में बारिश के टपकते पानी के बीच डॉ. कलमेश गुप्ता अपने निर्धारित समय पर न केवल इमरजेंसी में उपस्थित मिले, बल्कि मरीजों का इलाज करते दिखे। हालांकि बारिश के चलते मरीजों की संख्या आम दिनों के सापेक्ष बेहद कम रही।
अमर उजाला की टीम शुक्रवार की सुबह 10 बजकर 5 मिनट पर रानीपुर ब्लाक मुख्यालय के खुरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। टीम को यहां 1985 में बना भवन जो कि वर्तमान में कंडम स्थिति में पहुंच गया है। उसमें बने इमरजेंसी कक्ष में डॉ. कमलेश गुप्ता बैठे मिले। टीम ने पाया कि जिस जगह डाक्टर बैठा था, उसके सामने छत से पानी रिसकर नीचे फर्श पर एकत्रित हो रहा था। बावजूद चिकित्सक अपनी सीट पर मरीजों का इलाज करते दिखे।
जानकारी लेने पर पता चला कि चार बेड के इस अस्पताल में प्रभारी सहित छह पद है। लेकिन वर्तमान में डाक्टर कमलेश को छोड़कर सभी की ड्यूटी अलग अलग जगह लगी हुई है। जहां प्रभारी को काझा खुर्द पीएचसी पर अटैच है, वहीं फार्मासिस्ट की ड्यूटी जिले पर लगी है। वहीं लैब टेक्नीशियन की ड्यूटी सीएचसी रानीपुर पर कोविड-19 जांच में जबकि वार्डब्याय की ड्यूटी कोविड अस्पताल एल-1 में लगी है। ऐसे में वर्तमान में पीएचसी एकमात्र चिकित्सक डॉ. कमलेश गुप्ता और नान मेडिकल कर्मचारी के भरोसे संचालित हो रहा है।
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जर्जर भवन के चलते इलाज कराने से कन्नी काटते हैं मरीज
रानीपुर। बताते चले कि पीएचसी के भरोसे खुरहट, कसारी, अमरहट, सोनिसा, धर्मपुर सहित 20 से ज्यादा गांव की 10 हजार से ज्यादा ग्रामीणों का स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। लेकिन तीन दशक पुराने भवन की बदहाली के चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या बेहद कम रहती है। बहुत ही गंभीर समस्या या किसी चिकित्सक के न होने पर लोग पीएचसी जाते है। उधर जर्जर भवन के चलते इसमें तैनात स्वास्थ्य कर्मी भी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे है।
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अमर उजाला की टीम शुक्रवार की सुबह 10 बजकर 5 मिनट पर रानीपुर ब्लाक मुख्यालय के खुरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। टीम को यहां 1985 में बना भवन जो कि वर्तमान में कंडम स्थिति में पहुंच गया है। उसमें बने इमरजेंसी कक्ष में डॉ. कमलेश गुप्ता बैठे मिले। टीम ने पाया कि जिस जगह डाक्टर बैठा था, उसके सामने छत से पानी रिसकर नीचे फर्श पर एकत्रित हो रहा था। बावजूद चिकित्सक अपनी सीट पर मरीजों का इलाज करते दिखे।
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जानकारी लेने पर पता चला कि चार बेड के इस अस्पताल में प्रभारी सहित छह पद है। लेकिन वर्तमान में डाक्टर कमलेश को छोड़कर सभी की ड्यूटी अलग अलग जगह लगी हुई है। जहां प्रभारी को काझा खुर्द पीएचसी पर अटैच है, वहीं फार्मासिस्ट की ड्यूटी जिले पर लगी है। वहीं लैब टेक्नीशियन की ड्यूटी सीएचसी रानीपुर पर कोविड-19 जांच में जबकि वार्डब्याय की ड्यूटी कोविड अस्पताल एल-1 में लगी है। ऐसे में वर्तमान में पीएचसी एकमात्र चिकित्सक डॉ. कमलेश गुप्ता और नान मेडिकल कर्मचारी के भरोसे संचालित हो रहा है।
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जर्जर भवन के चलते इलाज कराने से कन्नी काटते हैं मरीज
रानीपुर। बताते चले कि पीएचसी के भरोसे खुरहट, कसारी, अमरहट, सोनिसा, धर्मपुर सहित 20 से ज्यादा गांव की 10 हजार से ज्यादा ग्रामीणों का स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। लेकिन तीन दशक पुराने भवन की बदहाली के चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या बेहद कम रहती है। बहुत ही गंभीर समस्या या किसी चिकित्सक के न होने पर लोग पीएचसी जाते है। उधर जर्जर भवन के चलते इसमें तैनात स्वास्थ्य कर्मी भी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे है।