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जूनियर इंजीनियरों ने विभिन्न मांगों को लेकर दिया धरना
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मऊ। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के तत्वावधान में जूनियर इंजीनियरों ने वेतन संबंधी विषमताओं के निराकरण सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में विरोध सभा का आयोजन किया। 26 से 28 अक्तूबर को दो घंटे कार्य बहिष्कार जनपद मुख्यालय पर किया जाएगा। 29 अक्तूबर से क्षेत्रीय मुख्यालय पर संपूर्ण कार्य बहिष्कार तथा जेल भरो आंदोलन प्रस्तावित है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जूनियर इंजीनियर संवर्ग प्रदेश की जनता को शासन की मंशानुरूप बिजली देने का काम करता है। कोरोना जैसी विभीषिका में भी अपने प्राणों को दांव पर लगाकर और अपने कई लोगों को खोकर भी जनता को अनवरत बिजली आपूर्ति बनाए रखा। ऐसा संवर्ग भी जनता से उनकी बिजली बंद करने के बारे में उसकी मंशा नहीं रहती। इसी वजह से सर्वप्रथम ध्यानाकर्षण आंदोलन व क्रमिक उपवास कर प्रबंधन व शासन से अपनी वेतन विसंगतियां, विभागीय कार्यों के निष्पादन, विद्युत आपूर्ति हेतु धरातल पर आ रही समस्याओं के निराकरण कर लगातार प्रयास करता रहा। लेकिन लगातार बढ़ते उत्पीड़न, मानसिक दबाव के कारण अवर अभियंता लगातार रोगग्रस्त होते जा रहे हैं।
प्रबंधन की गलत नीतियों व कुप्रबंधन के कारण हुए वित्तीय घाटे का कारण अवर अभियंताओं को बताकर उसका दुष्प्रचार कर उनको बदनाम करने के पश्चात विभाग के निजीकरण की साजिश व प्रबंधकीय असफलताओं को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। अब प्रोन्नत अभियंता अपनी वेतन संबंधी विसंगतियों में वेतन वृद्धि की मांग नहीं कर रहे हैं वह केवल पूर्व के आदेशों के क्रियान्वयन व अप्रचलित वेतन 4800 रुपये को हटाए जाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही सही वरिष्ठता निर्धारण की मांग कर रहे हैं। विरोध सभा को जमुना प्रसाद, प्रदीप सिंह, सत्यदेव सरोज, देवेंद्र कुमार उपाध्याय, आशुतोष त्रिपाठी, अमित सिंह, अश्वनी चौहान, स्वामीनाथ कुशवाहा, रविचंद, पवन तिवारी आदि उपस्थित रहे।
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इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जूनियर इंजीनियर संवर्ग प्रदेश की जनता को शासन की मंशानुरूप बिजली देने का काम करता है। कोरोना जैसी विभीषिका में भी अपने प्राणों को दांव पर लगाकर और अपने कई लोगों को खोकर भी जनता को अनवरत बिजली आपूर्ति बनाए रखा। ऐसा संवर्ग भी जनता से उनकी बिजली बंद करने के बारे में उसकी मंशा नहीं रहती। इसी वजह से सर्वप्रथम ध्यानाकर्षण आंदोलन व क्रमिक उपवास कर प्रबंधन व शासन से अपनी वेतन विसंगतियां, विभागीय कार्यों के निष्पादन, विद्युत आपूर्ति हेतु धरातल पर आ रही समस्याओं के निराकरण कर लगातार प्रयास करता रहा। लेकिन लगातार बढ़ते उत्पीड़न, मानसिक दबाव के कारण अवर अभियंता लगातार रोगग्रस्त होते जा रहे हैं।
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प्रबंधन की गलत नीतियों व कुप्रबंधन के कारण हुए वित्तीय घाटे का कारण अवर अभियंताओं को बताकर उसका दुष्प्रचार कर उनको बदनाम करने के पश्चात विभाग के निजीकरण की साजिश व प्रबंधकीय असफलताओं को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। अब प्रोन्नत अभियंता अपनी वेतन संबंधी विसंगतियों में वेतन वृद्धि की मांग नहीं कर रहे हैं वह केवल पूर्व के आदेशों के क्रियान्वयन व अप्रचलित वेतन 4800 रुपये को हटाए जाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही सही वरिष्ठता निर्धारण की मांग कर रहे हैं। विरोध सभा को जमुना प्रसाद, प्रदीप सिंह, सत्यदेव सरोज, देवेंद्र कुमार उपाध्याय, आशुतोष त्रिपाठी, अमित सिंह, अश्वनी चौहान, स्वामीनाथ कुशवाहा, रविचंद, पवन तिवारी आदि उपस्थित रहे।
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