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इंटर पास युवक चलाता था अस्पताल, जेल
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मऊ। शहर कोतवाली क्षेत्र के ख्वाजाजहांपुर मुहल्ले में हाईवे के किनारे एक बिल्डिंग में हॉस्पिटल चलाने वाला इंटरमीडिएट पास निकला। मामले में पुलिस ने आरोपी के साथ दो अन्य कथित डाक्टरों तथा एक आशा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया।
ख्वाजाजहांपुर में हाईवे के किनारे बिल्डिंग में लगभग एक साल पहले त्रिदेव अस्पताल खोला गया था। बाद में उसका नाम बदलकर ओम हॉस्पिटल कर दिया गया। जून में उस अस्पताल में मधुबन के हिराज पट्टी वार्ड निवासी मनीष शर्मा की बहन की रीढ़ की हड्डी में दर्द होने पर उसे क्षेत्र की आशा की सलाह पर इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आरोप है कि इलाज में लापरवाही के चलते महिला की हालत बिगड़ गई। इस पर मनीष ने अस्पताल के डाक्टरों, कर्मचारियों और आशा के विरुद्ध पुलिस को तहरीर दी थी। इस बीच फर्जी डाक्टर ने घोसी के करीमुद्दीनपुर में आसमा नाम से अस्पताल खोल लिया। मुकदमे के विवेचक शिवमूर्ति तिवारी आरोपी की तलाश करते हुए घोसी पहुंच गए। वहां भी 30 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। पुलिस ने जब अस्पताल संचालक से उसकी मेडिकल डिग्री मांगी तो वह नहीं दिखा सका।
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जांच में पता चला कि उसके पास कोई डिग्री नहीं है, वह केवल इंटर पास है। पुलिस ने उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया। अस्पताल संचालक उमेश कुमार सिंह गाजीपुर के जमानिया का निवासी है। पुलिस ने इस मामले में उमेश कुमार सिंह, डॉ. पूजा, डॉ. सुनील कुमार और मधुबन निवासी आशा मेवाती के विरुद्ध धोखाधड़ी और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। उसे 14 दिन के रिमांड पर जेल भेज दिया गया। विवेचक शिवमूर्ति तिवारी ने बताया कि उमेश के विरुद्ध गाजीपुर में भी दो मुुकदमे दर्ज हैं। यह स्थान और नाम बदलकर अस्पताल चलाता रहता है। इसके पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है।
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ख्वाजाजहांपुर में हाईवे के किनारे बिल्डिंग में लगभग एक साल पहले त्रिदेव अस्पताल खोला गया था। बाद में उसका नाम बदलकर ओम हॉस्पिटल कर दिया गया। जून में उस अस्पताल में मधुबन के हिराज पट्टी वार्ड निवासी मनीष शर्मा की बहन की रीढ़ की हड्डी में दर्द होने पर उसे क्षेत्र की आशा की सलाह पर इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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आरोप है कि इलाज में लापरवाही के चलते महिला की हालत बिगड़ गई। इस पर मनीष ने अस्पताल के डाक्टरों, कर्मचारियों और आशा के विरुद्ध पुलिस को तहरीर दी थी। इस बीच फर्जी डाक्टर ने घोसी के करीमुद्दीनपुर में आसमा नाम से अस्पताल खोल लिया। मुकदमे के विवेचक शिवमूर्ति तिवारी आरोपी की तलाश करते हुए घोसी पहुंच गए। वहां भी 30 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। पुलिस ने जब अस्पताल संचालक से उसकी मेडिकल डिग्री मांगी तो वह नहीं दिखा सका।
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जांच में पता चला कि उसके पास कोई डिग्री नहीं है, वह केवल इंटर पास है। पुलिस ने उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया। अस्पताल संचालक उमेश कुमार सिंह गाजीपुर के जमानिया का निवासी है। पुलिस ने इस मामले में उमेश कुमार सिंह, डॉ. पूजा, डॉ. सुनील कुमार और मधुबन निवासी आशा मेवाती के विरुद्ध धोखाधड़ी और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। उसे 14 दिन के रिमांड पर जेल भेज दिया गया। विवेचक शिवमूर्ति तिवारी ने बताया कि उमेश के विरुद्ध गाजीपुर में भी दो मुुकदमे दर्ज हैं। यह स्थान और नाम बदलकर अस्पताल चलाता रहता है। इसके पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है।