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उज्ज्वला योजना में शामिल, लेकिन सिलिंडर के बजाए चूल्हें पर बन रहा है भोजन
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मऊ। जिले में एक मई 2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्जवला योजना का लाभ कई साल बीतने के बाद भी जनपद में फलीभूत होती नहीं दिख रही है। जिले में एक लाख 19 हजार उज्ज्वला गैस कनेक्शन धारक है। लेकिन 40 फीसदी लाभार्थी आज भी सिलिंडर के बजाए आज भी चूल्हे पर ही खाना बनाने को विवश है। ऐसे में केंद्र सरकार की माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ती दिलाने की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है। यह स्थिति कोरोना संक्रमण काल में जारी है। चौंकाने वाली बात है कि संक्रमण काल के विषम परिस्थिति में लाभार्थियों को प्रधानमंत्री कल्याण गरीब योजना के तहत सिलिंडर रीफिलिंग कराने के लिए खाते में राशि भेजा जाना है।
जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एक लाख 19 हजार लाभार्थियों को पंजीकृत किया गया है। इसमें 40 हजार भारत पेट्रोलियम से संबंधित है। योजना के तहत लाभार्थियों को मुफ्त में गैस सिलिंडर बांटे गए। इसके बाद भी केंद्र सरकार का मकसद पूरा होता नहीं दिख रहा है। जिले के चार तहसील के नौ ब्लाकों में बहुत से लोग हैं जो मुफ्त में मिल सिलिंडर को इस्तेमाल करने के बाद दोबारा लौटकर सिलेंडर भरवाने नहीं आए। जबकि कइयों ने तो मुफ्त में मिला हुआ गैस सिलेंडर भी इस्तेमाल नहीं किया, क्योंकि चूल्हा खरीदने में पैसे खर्च होते। इसके पीछे लाभार्थियों का तर्क है कि वह पहले से गरीब है। ऐसे में उनके पास सिलिंडर को दोबारा भरवाना का पैसा नहीं है। इतने पैसे कहां से लाएंगी, पहले 520 रुपए में सिलेंडर दिया अब 770 रुपए लग रहे हैं।
प्रधानमंत्री कल्याण गरीब योजना भी फेल
मऊ। कोरोना संक्रमण काल में केंद्र सरकार ने लाभार्थियों को आर्थिक समस्या को देखते हुए महामारी के दौरान प्रधानमंत्री कल्याण गरीब योजना के तहत लाभार्थियों के खाते में राशि भेजी जा रही है। लेकिन यह योजना का लाभ सभी लाभार्थियों को नहीं मिलता दिख रहा है। बात करने पर जिला पूर्ति अधिकारी हिमांशु द्विवेदी ने बताया कि इस संबंध में पेट्रोलियम विभाग की तरफ से नामित नोडल अधिकारी ही बता पाएंगे, कि कितने पात्रों के खाते में रिफिलिंग के लिए धनराशि भेजी गई। बोले सरकार संख्या के आधार पर यह धनराशि सीधे उन पेट्रेलियम संचालकों को उपलब्ध कराती है, जितना वो डिमांड भेजते है। हम सिर्फ मानिटरिंग अथार्टी है।
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जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एक लाख 19 हजार लाभार्थियों को पंजीकृत किया गया है। इसमें 40 हजार भारत पेट्रोलियम से संबंधित है। योजना के तहत लाभार्थियों को मुफ्त में गैस सिलिंडर बांटे गए। इसके बाद भी केंद्र सरकार का मकसद पूरा होता नहीं दिख रहा है। जिले के चार तहसील के नौ ब्लाकों में बहुत से लोग हैं जो मुफ्त में मिल सिलिंडर को इस्तेमाल करने के बाद दोबारा लौटकर सिलेंडर भरवाने नहीं आए। जबकि कइयों ने तो मुफ्त में मिला हुआ गैस सिलेंडर भी इस्तेमाल नहीं किया, क्योंकि चूल्हा खरीदने में पैसे खर्च होते। इसके पीछे लाभार्थियों का तर्क है कि वह पहले से गरीब है। ऐसे में उनके पास सिलिंडर को दोबारा भरवाना का पैसा नहीं है। इतने पैसे कहां से लाएंगी, पहले 520 रुपए में सिलेंडर दिया अब 770 रुपए लग रहे हैं।
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प्रधानमंत्री कल्याण गरीब योजना भी फेल
मऊ। कोरोना संक्रमण काल में केंद्र सरकार ने लाभार्थियों को आर्थिक समस्या को देखते हुए महामारी के दौरान प्रधानमंत्री कल्याण गरीब योजना के तहत लाभार्थियों के खाते में राशि भेजी जा रही है। लेकिन यह योजना का लाभ सभी लाभार्थियों को नहीं मिलता दिख रहा है। बात करने पर जिला पूर्ति अधिकारी हिमांशु द्विवेदी ने बताया कि इस संबंध में पेट्रोलियम विभाग की तरफ से नामित नोडल अधिकारी ही बता पाएंगे, कि कितने पात्रों के खाते में रिफिलिंग के लिए धनराशि भेजी गई। बोले सरकार संख्या के आधार पर यह धनराशि सीधे उन पेट्रेलियम संचालकों को उपलब्ध कराती है, जितना वो डिमांड भेजते है। हम सिर्फ मानिटरिंग अथार्टी है।
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