मऊ। सदर विधानसभा सीट से आज तक किसी भी महिला का प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिल सका है। मुख्तार अंसारी के लगातार पांच बार से चुनाव जीतने से यह सीअ काफी चर्चाओं में वैसे ही रहती है। हालांकि जिले की चार विधानसभा सीटों में यह सीट काफी अहम है। यहां महिला मतदाताओं की संख्या भी अधिक है। इसके बाद भी आधी आबादी का मौका नहीं मिल सका। कभी यहां से किसी महिला को चुनाव जीतकर प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला। प्रमुख दलों ने यहां से कभी महिला प्रत्याशी उतारा ही नहीं। हालांकि दो बार महिला प्रत्याशी के रूप में स्व. कल्पनाथ राय की बहू डा. सीता राय ने जरूर चुनाव लड़ा था। लेकिन उन्हें जनप्रतिनिधि बनने का मौका नहीं मिल सका। जिले की चारों विधानसभाओं में सबसे अधिक महिला मतदाता सदर विधानसभा क्षेत्र में हैं, यहां कुल 2,25,487 मतदाता हैं। जबकि मुहम्मदाबाद गोहना में 1,77,436, घोसी में 2,02,639 तथा मधुबन में महिला मतदाताओं की संख्या 1,87,704 है। लेकिन इसके बावजूद भी विभिन्न पार्टियों द्वारा महिलाओं को इस सीट पर प्राथमिकता नहीं दी जाती है। पिछले विधानसभा चुनावों में दो बार के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो किसी भी प्रमुख दलों ने महिला प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा। इतना ही नहीं निर्दल प्रत्याशी के रूप में भी किसी महिला प्रत्याशी ने यहां से दावेदारी नहीं की। सदर विधानसभा क्षेत्र में आधी आबादी के प्रतिनिधित्व एवं दावेदारी के हिसाब से सदर विधानसभा की सीट पर हमेशा ही महिलाओं की उपेक्षा हुई है। इस सीट पर किसी महिला को कभी प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिला। 2007 में जद (यू) तथा 2002 में समता पार्टी से नामांकन किया गया था। क्षेत्र की महिलाओं का कहना है कि है महिलाओं को उनके आरक्षण 33 प्रतिशत के हिसाब से पंचायत चुनाव की भांति सामान्य चुनाव में भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।