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Mau News: नियमित हो जांच, तो जन आरोग्य मेले में कई स्वास्थ्य केंद्राें की खुलेगी पोल

Tue, 23 Apr 2024 01:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Apr 2024 01:25 AM IST
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If testing becomes regular, many health centers will be exposed in Jan Arogya Mela.
मऊ। शासन के निर्देश पर मरीजों को उनके घर के पास निशुल्क जांच और उपचार के लिए सभी पीएचसी पर स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें मरीजाें का विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओर से उपचार किया जाता है। रैनी पीएचसी पर बीते रविवार को होने वाले आरोग्य मेले में पूरे दिन ताला बंद रहा, बावजूद इसके कागज में रैनी पीएचसी पर चार चिकित्सक, 14 पैरामेडिकल की टीम ने 37 पुरुष, 26 महिला, चार बच्चे सहित कुल 67 मरीज का उपचार कागज में दिखा दिया गया। अगर स्वास्थ्य विभाग सभी पीएचसी की जांच करे तो जनपद की कई अन्य पीएचसी पर इस तरह के मामले सामने आएंगे। जनपद में कई ऐसी पीएचसी हैं, जहां अभी भी गलत रिपोर्टिंग हो रही है। कुछ पीएचसी तो ऐसे है, जहां मरीजों की संख्या दहाई में भी नहीं पहुंच रही है।
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हर रविवार को जिले के सभी पीएचसी पर जन आरोग्य मेले का आयोजन किया जाता है। कोरोना काल के दौरान और उसके बाद से लोगों को घर के पास सही उपचार मिले इस उद्देश्य से आयोजित मेले की शुरुआती दौर में लोगों को काफी बेहतर चिकित्सा की सुविधा मिली थी। स्वास्थ्य विभाग के साथ जनप्रतिनिधियों की पहल पर मेले का आयोजन किया गया था। लेकिन शुरुआती दौर के बाद से अब यह जन आरोग्य मेला महज औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह गया है। जनपद की 40 पीएससी पर होने वाले मेले में करीब आधा दर्जन ऐसे स्वास्थ्य केंद्र है जहां अभी तक मरीजों की संख्या बहुत मुश्किल दहाई तक पहुंच सकी है। विभाग की ओर से जो आंकड़े जारी किए जाते हैं उसमें करीब ऑस्टिन जन आरोग्य मेले में 1500 के मरीजों का उपचार किया जाता है जबकि मौसम पूरी तरह विपरीत होने पर यह आंकड़ा दो हजार के पार भी पहुंचता है। इस आयोजन की एक सच्चाई यह भी है कि कभी भी विभागीय अधिकारियों जन आरोग्य मेले का निरीक्षण नहीं करने जाते। न ही कोई ऐसी पहल की जाती है जिससे जहां मरीजों की संख्या कम है वहां किन सुविधाओं को शामिल किया जाए। जिससे मरीजों की संख्या ऐसे स्वास्थ्य केंद्र पर बढ़ सके।
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किन स्वास्थ्य केंद्रों का है बुरा हाल

जन आरोग्य मेले में अभी तक गोंठा, बेला कसैला, नदवासराय, अदरी, चोरपा कला, हलधरपुर, दुबारी, कसारा, रसूलपुर, कुर्थीजाफरपुर में मरीजों की संख्या बड़ी मुश्किल से दहाई में पहुंचती है। एक तरफ विभाग की ओर से दावा किया जाता है की स्वास्थ्य केंद्रों पर रह कर ही चिकित्सक के साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी मरीज को बेहतर सुविधा देने में लगे हुए हैं। लेकिन अनेक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी कब आते हैं और कब चले जाते हैं इसकी जानकारी आसपास के लोगों को भी नहीं हो पाती है।
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