{"_id":"6526ed007fba5733b2075c84","slug":"if-kandam-bhawan-is-demolished-then-district-womens-hospital-will-be-built-mau-news-c-20-vns1028-388302-2023-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: कंडम भवन गिराया जाय तो बने जिला महिला अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: कंडम भवन गिराया जाय तो बने जिला महिला अस्पताल
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल खुद के भवन की बाट पिछले कई सालों से जोह रहा है। तीन वर्षों से दो विभागों के बीच अटकी फाइल इसके निर्माण में बाधा बनी है। कंडम पड़े जिला महिला अस्पताल को ध्वस्त करा कर यहीं पर नया महिला अस्पताल बनाया जाना है। स्वास्थ्य विभाग ने लोक निर्माण विभाग को 12 बार इस भवन को ध्वस्त कराने के लिए नोटिस भेजा। लेकिन नतीजा सिफर है। मौजूदा समय में महिला अस्पताल परिसर में बने मैटरनिटी विंग में संचालित किया जा रहा है।
100 बेड वाला महिला जिला अस्पताल 2019-20 से मेटरनिटी विंग के पांच मंजिला भवन में संचालित हो रहा है। ऐसे तो मेटरनिटी विंग में ओपीडी का संचालन नहीं हो सकता, लेकिन महिला अस्पताल का पुराना भवन होने के चलते इसे यहां से संचालित किया जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता रामायण यादव ने बताया कि कंडम अस्पताल के भवन को ढहाने के बाद यहां नया अस्पताल भवन बनाया जाने की योजना तैयार हो चुकी है। लेकिन ध्वस्तीकरण न होने से मामला रुका हुआ है। भवन गिराने का कार्य लोक निर्माण विभाग को करना है। बीते तीन सालों से अब तक 12 बार सूचना दी जा चुकी है।
बताते चले कि शासन की योजना थी कि महिला जिला अस्पताल के बगल में मेटरनिटी विंग को पीपीपी माॅडल पर संचालित कर महिला मरीजों को बेहतर दोहरी चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध करायी जा सकें। लेकिन दो विभागों के तालमेल न होने से यह योजना तीन साल से फाइलों में दबकर दम तोड़ रही है।
विज्ञापन
इनसेट
खबर पर ही मेटरनिटी विंग में शुरू हुआ था अस्पताल
मऊ। कंडम भवन में अस्पताल के संचालन से हो रही परेशानी को देखते हुए अमर उजाला ने 31 जुलाई 2018 को टपक रहे लेबर रूम में कराया जा रहा प्रसव सहित दूसरे शीर्षकों से कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिस पर दो अगस्त 2018 को तत्कालीन सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी ने महिला जिला अस्पताल को नवीन भवन में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। 2019 में नवरात्र पर तत्कालीन सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता ने पांच मंजिला भवन के बनने पर अस्पताल को शिफ्ट कर दियाथा। उधर इसके बाद बेकार भवन घोषित हो चुके पुराने जिला महिला अस्पताल को ध्वस्त कर उस पर नया भवन बनाने की कवायद स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की थी।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
एमसीएच विंग में मां शिशु का होता है इलाज
मऊ। एमसीएच विंग (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) में मां और शिशु का उपचार एक ही छत के नीचे किया जाता है। प्रसव से पहले गर्भवती को इस विंग में रखा जाता है। प्रसव के बाद शिशु के इलाज के साथ मां का इलाज यहां होता है। 100 बेड के इस मैटरनल एंड चाइल्डविंग से गर्भवती और उनके शिशुओं का इलाज आसान हुआ है।
कोट
जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण को लेकर विभाग ने सभी आवश्यक कार्रवाई पूरा कर इसे लोक निर्माण विभाग को दे दिया है। - डा. नंद कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी
जिला महिला चिकित्सालय के कंडम भवन के मामले में स्वास्थ्य विभाग का पत्र संज्ञान में नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेकर अगली कार्यवाही की जाएगी। -सौरभ सिंह, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड
विज्ञापन
100 बेड वाला महिला जिला अस्पताल 2019-20 से मेटरनिटी विंग के पांच मंजिला भवन में संचालित हो रहा है। ऐसे तो मेटरनिटी विंग में ओपीडी का संचालन नहीं हो सकता, लेकिन महिला अस्पताल का पुराना भवन होने के चलते इसे यहां से संचालित किया जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता रामायण यादव ने बताया कि कंडम अस्पताल के भवन को ढहाने के बाद यहां नया अस्पताल भवन बनाया जाने की योजना तैयार हो चुकी है। लेकिन ध्वस्तीकरण न होने से मामला रुका हुआ है। भवन गिराने का कार्य लोक निर्माण विभाग को करना है। बीते तीन सालों से अब तक 12 बार सूचना दी जा चुकी है।
विज्ञापन
बताते चले कि शासन की योजना थी कि महिला जिला अस्पताल के बगल में मेटरनिटी विंग को पीपीपी माॅडल पर संचालित कर महिला मरीजों को बेहतर दोहरी चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध करायी जा सकें। लेकिन दो विभागों के तालमेल न होने से यह योजना तीन साल से फाइलों में दबकर दम तोड़ रही है।
विज्ञापन
इनसेट
खबर पर ही मेटरनिटी विंग में शुरू हुआ था अस्पताल
मऊ। कंडम भवन में अस्पताल के संचालन से हो रही परेशानी को देखते हुए अमर उजाला ने 31 जुलाई 2018 को टपक रहे लेबर रूम में कराया जा रहा प्रसव सहित दूसरे शीर्षकों से कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिस पर दो अगस्त 2018 को तत्कालीन सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी ने महिला जिला अस्पताल को नवीन भवन में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था। 2019 में नवरात्र पर तत्कालीन सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता ने पांच मंजिला भवन के बनने पर अस्पताल को शिफ्ट कर दियाथा। उधर इसके बाद बेकार भवन घोषित हो चुके पुराने जिला महिला अस्पताल को ध्वस्त कर उस पर नया भवन बनाने की कवायद स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की थी।
एमसीएच विंग में मां शिशु का होता है इलाज
मऊ। एमसीएच विंग (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) में मां और शिशु का उपचार एक ही छत के नीचे किया जाता है। प्रसव से पहले गर्भवती को इस विंग में रखा जाता है। प्रसव के बाद शिशु के इलाज के साथ मां का इलाज यहां होता है। 100 बेड के इस मैटरनल एंड चाइल्डविंग से गर्भवती और उनके शिशुओं का इलाज आसान हुआ है।
कोट
जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण को लेकर विभाग ने सभी आवश्यक कार्रवाई पूरा कर इसे लोक निर्माण विभाग को दे दिया है। - डा. नंद कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी
जिला महिला चिकित्सालय के कंडम भवन के मामले में स्वास्थ्य विभाग का पत्र संज्ञान में नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेकर अगली कार्यवाही की जाएगी। -सौरभ सिंह, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड