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धनराशि समाप्त, गांव में नहीं दिख रहा विकास
ब्यूरो, अमर उजाला/ मऊ
Updated Wed, 28 Sep 2016 12:26 AM IST
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अब इसे गड़बड़झाला कहें या फिर उपलब्धि की 365 दिन चलने वाली मनरेगा योजना का लक्ष्य मऊ जिले में चार माह यानी 122 दिन में ही पूरा कर लिया गया। क्योंकि मई और जुलाई माह 31 दिन का होता है। इस बीच जिले के जिम्मेदार अधिकारी स्थानांतरित हो गए। इस कारण इस लक्ष्य के बारे में कोई बताने वाला नहीं है। दूसरी तरफ रोजगार गारंटी योजना के नाम से लागू इस योजना के तहत काम पूरा होने पर मजदूर सौ दिन के काम पाने से वंचित है।
जिले में लक्ष्य की पूरी पारी खेल चुकी मनरेगा के सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के नौ ब्लाकों में 5365 मजदूरों को इस योजना के तहत 100 दिन से अधिक काम दिया गया। जबकि शासनादेश है कि एक मजदूर को अधिकतम 100 दिन का काम देना है, अधिक दिन काम देने पर उस मजदूर को किए गए भुगतान की रिकवरी ब्लाक के संबंधित अधिकारियों से की जानी है। जिले में वित्तीय वर्ष 2016-2017 के लिए मनरेगा के तहत 35 लाख चार हजार पांच सौ 30 का लेबर बजट शासन से स्वीकृत किया गया था। अप्रैल माह से शुरू हुआ वित्तीय वर्ष इस योजना के लिए जुलाई में ही पूरा हो गया।
20 सितंबर 2016 के सरकारी आंकड़े के अनुसार इन चार माह में गांवों में विकास का काम करा लिया गया और बदले में 35 लाख 99 हजार पांच सौ 16 मानव दिवस सृजित कर उन्हें मनरेगा के निर्धारित दर से करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। अब सरकारी आंकड़े को मानें तो कई प्रश्न उठते है, इसमें क्या जिले के रानीपुर ब्लाक में ही सबसे ज्यादा मनरेगा मजदूर है और ब्लाक मनरेगा मजदूर विहिन है?
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क्योंकि 122 दिन में संपन्न हुए काम में रानीपुर ब्लाक के 1348 मजदूरों को काम दिया गया है। इसीक्रम में सबसे कम काम परदहां ब्लाक क्षेत्र में होना बताया गया है, क्योंकि परदाहां ब्लाक शहर से लगा ब्लाक है। यहां यह बताना जरूरी है कि रानीपुर ब्लाक क्षेत्र जिले का वह हिस्सा है जहां पर जाने के लिए लिंक मार्गों का सहारा लिया जाता है। विभागीय सूत्रों की माने तो पूरे वर्ष के लक्ष्य से 20 सितंबर 16 तक 94 हजार नौ सौ रुपये 86 मानव दिवस अधिक सृजित कर यह भुगतान किया गया है।
जबकि इस वित्तीय वर्ष में अभी भी छह माह बचा है। बताते चले मनरेगा मजदूरों की दो कटेगरी शासन से निर्धारित है। इसमें अकुशल मजदूरों को 174 रुपये प्रति दिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती है। वही कुशल मजदूरों को 350 रुपये प्रति दिन के हिसाब से दिहाड़ी का भुगतान होता है। विभाग की आंकड़े के हिसाब से चार माह में मनरेगा मजदूरों को 57 करोड़ 95 लाख के लगभग रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
उपायुक्त मनरेगा तेज भान सिंह ने कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष काम पूरा कर लिया गया है। आगे ब्लाकों से कार्ययोजना आने पर शासन को प्रस्ताव भेजकर बजट मंगाया जाएगा। पूछे जाने पर क्या लक्ष्य के सापेक्ष संपन्न हुआ कार्य ज्यादा नहीं है, इस पर डीसी मनरेगा कुछ नहीं बोले।
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जिले में लक्ष्य की पूरी पारी खेल चुकी मनरेगा के सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के नौ ब्लाकों में 5365 मजदूरों को इस योजना के तहत 100 दिन से अधिक काम दिया गया। जबकि शासनादेश है कि एक मजदूर को अधिकतम 100 दिन का काम देना है, अधिक दिन काम देने पर उस मजदूर को किए गए भुगतान की रिकवरी ब्लाक के संबंधित अधिकारियों से की जानी है। जिले में वित्तीय वर्ष 2016-2017 के लिए मनरेगा के तहत 35 लाख चार हजार पांच सौ 30 का लेबर बजट शासन से स्वीकृत किया गया था। अप्रैल माह से शुरू हुआ वित्तीय वर्ष इस योजना के लिए जुलाई में ही पूरा हो गया।
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20 सितंबर 2016 के सरकारी आंकड़े के अनुसार इन चार माह में गांवों में विकास का काम करा लिया गया और बदले में 35 लाख 99 हजार पांच सौ 16 मानव दिवस सृजित कर उन्हें मनरेगा के निर्धारित दर से करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। अब सरकारी आंकड़े को मानें तो कई प्रश्न उठते है, इसमें क्या जिले के रानीपुर ब्लाक में ही सबसे ज्यादा मनरेगा मजदूर है और ब्लाक मनरेगा मजदूर विहिन है?
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क्योंकि 122 दिन में संपन्न हुए काम में रानीपुर ब्लाक के 1348 मजदूरों को काम दिया गया है। इसीक्रम में सबसे कम काम परदहां ब्लाक क्षेत्र में होना बताया गया है, क्योंकि परदाहां ब्लाक शहर से लगा ब्लाक है। यहां यह बताना जरूरी है कि रानीपुर ब्लाक क्षेत्र जिले का वह हिस्सा है जहां पर जाने के लिए लिंक मार्गों का सहारा लिया जाता है। विभागीय सूत्रों की माने तो पूरे वर्ष के लक्ष्य से 20 सितंबर 16 तक 94 हजार नौ सौ रुपये 86 मानव दिवस अधिक सृजित कर यह भुगतान किया गया है।
जबकि इस वित्तीय वर्ष में अभी भी छह माह बचा है। बताते चले मनरेगा मजदूरों की दो कटेगरी शासन से निर्धारित है। इसमें अकुशल मजदूरों को 174 रुपये प्रति दिन के हिसाब से मजदूरी दी जाती है। वही कुशल मजदूरों को 350 रुपये प्रति दिन के हिसाब से दिहाड़ी का भुगतान होता है। विभाग की आंकड़े के हिसाब से चार माह में मनरेगा मजदूरों को 57 करोड़ 95 लाख के लगभग रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
उपायुक्त मनरेगा तेज भान सिंह ने कहा कि लक्ष्य के सापेक्ष काम पूरा कर लिया गया है। आगे ब्लाकों से कार्ययोजना आने पर शासन को प्रस्ताव भेजकर बजट मंगाया जाएगा। पूछे जाने पर क्या लक्ष्य के सापेक्ष संपन्न हुआ कार्य ज्यादा नहीं है, इस पर डीसी मनरेगा कुछ नहीं बोले।