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कैसे होगी गेहूं की सिंचाई माइनरों का नहीं हो सका मरम्मत कार्य
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मऊ। मझवारा रबी फसलों की सिंचाई के समय माइनरों की मरम्मत कार्य नहीं कराया जा सका है। दिसंबर माह बीतने को है, लेकिन अभी तक नहर तथा माइनर में पानी नहीं छोड़ा जा सका है। सिंचाई के अभाव में किसानों को फसल नुकसान की चिंता सताने लगी है शिकायत के बाद भी मरम्मत नहीं कराया जा सका है।
दोहरीघाट पंप कैनाल नहर से संबद्ध पवनी माइनर तथा शारदा सहायक खंड 32 नहर से क्षेत्र के लिलारी भरौली, भेलाबांध, मूंगमास, लुदुही, पवनी, दरियाबाद, फिरोजपुर, कनिहारीपुर, हसनपुर, अल्लीपुर, सेनुराइच, जयरामगढ़, लैरोदोनवार, रईसा, कसारा, इंदारा, महुआर
आदि गांवों से होकर गुजरी है। नहर से एक हजार हेक्टेयर से अधिक उपजाऊं जमीन की सिंचाई की जाती है। दिसंबर माह का अंतिम सप्ताह चल रहा है, लेकिन नहरों में समय से पानी न आने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीर दिखने लगी है। माइनर जगह-जगह टूटी पड़ी है। लेकिन मरम्मत कार्य नहीं कराया जा सका है। माइनर में पानी न छोड़े जाने से अधिकांश किसान निजी संसाधनों से कराने को विवश हैं।
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इस संबंध में किसान सूर्यभान पांडेय का कहना है कि सिंचाई विभाग नहर में पानी न छोड़कर किसानों के साथ अन्याय कर रहा है। पंपिगसेट से सिंचाई करने पर खेती की लागत बढ़ रही है। इसी क्रम में किसान सूर्य नारायण पांडेय का कहना है कि गेहूं की सिंचाई 21वे दिन की जाती है। यदि समय से सिंचाई नहीं होती तो इसका असर फसल के उत्पादन पर पड़ेगा। किसान विपुल पांडेय का कहना है कि राजवाहा में धूल उड़ रही है। जगह-जगह माइनरों के बंधे टूटे हुए हैं। राजवाहा माइनरों की अभी तक मरम्मत भी नहीं हो पाया है।
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दोहरीघाट पंप कैनाल नहर से संबद्ध पवनी माइनर तथा शारदा सहायक खंड 32 नहर से क्षेत्र के लिलारी भरौली, भेलाबांध, मूंगमास, लुदुही, पवनी, दरियाबाद, फिरोजपुर, कनिहारीपुर, हसनपुर, अल्लीपुर, सेनुराइच, जयरामगढ़, लैरोदोनवार, रईसा, कसारा, इंदारा, महुआर
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आदि गांवों से होकर गुजरी है। नहर से एक हजार हेक्टेयर से अधिक उपजाऊं जमीन की सिंचाई की जाती है। दिसंबर माह का अंतिम सप्ताह चल रहा है, लेकिन नहरों में समय से पानी न आने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीर दिखने लगी है। माइनर जगह-जगह टूटी पड़ी है। लेकिन मरम्मत कार्य नहीं कराया जा सका है। माइनर में पानी न छोड़े जाने से अधिकांश किसान निजी संसाधनों से कराने को विवश हैं।
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इस संबंध में किसान सूर्यभान पांडेय का कहना है कि सिंचाई विभाग नहर में पानी न छोड़कर किसानों के साथ अन्याय कर रहा है। पंपिगसेट से सिंचाई करने पर खेती की लागत बढ़ रही है। इसी क्रम में किसान सूर्य नारायण पांडेय का कहना है कि गेहूं की सिंचाई 21वे दिन की जाती है। यदि समय से सिंचाई नहीं होती तो इसका असर फसल के उत्पादन पर पड़ेगा। किसान विपुल पांडेय का कहना है कि राजवाहा में धूल उड़ रही है। जगह-जगह माइनरों के बंधे टूटे हुए हैं। राजवाहा माइनरों की अभी तक मरम्मत भी नहीं हो पाया है।