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कैसे होगी खेती, अधिकतर समितियों पर लगा है ताला
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Sun, 06 Nov 2016 11:48 PM IST
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रबी सीजन के पीक आवर में जिले के अधिकांश साधन सहकारी समितियों पर खाद और बीज की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। समितियों के नियमित न खुलने से किसानों को खाद बीज के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। जबकि जिला मुख्यालय पर खाद बीज की उपलब्धता के बाद भी किसानों को किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। समितियों पर ताला लटकने से निजी दूकानदारों की खूब चांदी कट रही है। वह मनमाने दाम पर बेच रहे हैं। शिकायत के बाद भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
जिले में किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए 92 साधन सहकारी समितियां, 10 पीसीएफ, 10 डीसीएफ, दो एग्रो के केंद्र हैं। इसके अलावा दर्जनों निजी दूकानों को लाइसेंस जारी किए गए हैं। रबी बुआई का सीजन अक्तूबर माह के प्रथम सप्ताह से ही शुरू हो जाता है। नवंबर माह में पहला सप्ताह बीतने को है, लेकिन अभी तक अधिकांश साधन सहकारी समितियों पर खाद-बीज की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। किसानों की मानें तो समितियों के नियमित न खुलने से खाद बीज की उपलब्धता का पता नहीं चल पा रहा है। गेहूं, आलू आदि की बुआई के लिए डीएपी, बीज सहित अन्य उर्वरकों की सख्त जरूरत है। रबी की बुआई के लिए जिले मुख्यालय के गोदाम में खाद बीज का पर्याप्त उपलब्धता है, इसके बावजूद समितियों पर खाद-बीज की किल्लत लोगों की समझ से परे है। घोसी ब्लाक के मझवारा, लुदुही, साधन सहकारी समितियों का अक्सर ताला ही लटकता रहता है। यह तो बानगी है।
पीक आवर में समितियों पर खाद बीज नदारद रहने से निजी दूकानदारों की खूब चांदी कट रही है। किसानों को मनमाने दाम पर बेच रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्राइवेट दूकानदारों को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल ऊपर से ही किया जाता है। वहीं जिले के विभागीय अधिकारी भी उदासीनता बरतते हैं। इस संबंध में एआर साधन सहकारी समिति रामनयन सिंह का कहना है कि साधन सहकारी समितियों पर खाद-बीज की आपूर्ति की गई है। वहीं उप निदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्रा का कहना है कि जिले में पर्याप्त खाद बीज की उपलब्धता है।
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जिले में किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए 92 साधन सहकारी समितियां, 10 पीसीएफ, 10 डीसीएफ, दो एग्रो के केंद्र हैं। इसके अलावा दर्जनों निजी दूकानों को लाइसेंस जारी किए गए हैं। रबी बुआई का सीजन अक्तूबर माह के प्रथम सप्ताह से ही शुरू हो जाता है। नवंबर माह में पहला सप्ताह बीतने को है, लेकिन अभी तक अधिकांश साधन सहकारी समितियों पर खाद-बीज की आपूर्ति नहीं की जा सकी है। किसानों की मानें तो समितियों के नियमित न खुलने से खाद बीज की उपलब्धता का पता नहीं चल पा रहा है। गेहूं, आलू आदि की बुआई के लिए डीएपी, बीज सहित अन्य उर्वरकों की सख्त जरूरत है। रबी की बुआई के लिए जिले मुख्यालय के गोदाम में खाद बीज का पर्याप्त उपलब्धता है, इसके बावजूद समितियों पर खाद-बीज की किल्लत लोगों की समझ से परे है। घोसी ब्लाक के मझवारा, लुदुही, साधन सहकारी समितियों का अक्सर ताला ही लटकता रहता है। यह तो बानगी है।
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पीक आवर में समितियों पर खाद बीज नदारद रहने से निजी दूकानदारों की खूब चांदी कट रही है। किसानों को मनमाने दाम पर बेच रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्राइवेट दूकानदारों को फायदा पहुंचाने के लिए यह खेल ऊपर से ही किया जाता है। वहीं जिले के विभागीय अधिकारी भी उदासीनता बरतते हैं। इस संबंध में एआर साधन सहकारी समिति रामनयन सिंह का कहना है कि साधन सहकारी समितियों पर खाद-बीज की आपूर्ति की गई है। वहीं उप निदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्रा का कहना है कि जिले में पर्याप्त खाद बीज की उपलब्धता है।
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