फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   How police and LIU investigated in making passport of foreign girl in mau

बांग्लादेशी युवती के पकड़े जाने का मामला: पुलिस, प्रधान और सेक्रेटरी की भूमिका पर सवाल, मऊ में फर्जी दस्तावेज से कैसे तैयार हो गया पासपोर्ट 

Tue, 23 Nov 2021 09:06 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 23 Nov 2021 09:06 PM IST
सार

प्रकरण को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि सही आवेदकों के सत्यापन में पुलिस और एलआईयू महीनों का समय लगा देती है जबकि सोना के मामले में पुलिस और एलआईयू ने ऑनलाइन सत्यापन रिपोर्ट लगा दी।

विज्ञापन
How police and LIU investigated in making passport of foreign girl in mau
मऊ पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई बांग्लादेशी युवती और युवक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक विदेशी युवती एक साल से मऊ में अपनी प्रेमी के साथ बतौर पत्नी बन कर रह रही थी और उसने स्थानीय नागरिक होने के सभी दस्तावेजी सबूत तैयार करा लिए। पासपोर्ट तक बन गया लेकिन प्रधान से लेकर सेक्रेटरी, पुलिस या एलआईयू किसी ने भी उसकी गहनता से जांच करने की जहमत नहीं उठाई।
विज्ञापन


रविवार देर शाम पति-पत्नी के झगड़े में मामला खुला तब से सभी चुप्पी साधे हैं। मामले में मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है। अक्टूबर 2020 में बांग्लादेश से भारत आई फरजाना प्रेमी के गांव युसुफपुर आकर सोना राजभर बन गई। इसके बाद उसका नाम गांव के कुटुंब रजिस्टर में श्रवण राजभर की बहू और गुलशन कुमार की पत्नी सोना के रूप में दर्ज हो गया।
विज्ञापन


नवंबर 2020 में परिवार रजिस्टर की नकल और 26 अगस्त 2021 को ग्राम प्रधान घनश्याम ने निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया जिसके आधार पर अन्य प्रमाण पत्रों के साथ उसने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। इसमें एलआईयू और पुलिस की जांच के बाद सत्यापन भी हो गया और कोपागंज थाने की पुलिस ने आवेदन सत्यापित करके अग्रसारित भी कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके आधार पर उसका पासपोर्ट भी बन गया। यह तो गुलशन और फरजाना के झगड़े में रविवार देर मामला पुलिस तक पहुंच गया। जिसके बाद लापरवाही की पूरी कहानी सामने आई है। प्रकरण को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि सही आवेदकों के सत्यापन में पुलिस और एलआईयू महीनों का समय लगा देती है जबकि सोना के मामले में पुलिस और एलआईयू ने ऑनलाइन सत्यापन रिपोर्ट लगा दी।

इसी प्रकार बिना अच्छी तरह से जांच पड़ताल किए ही सेक्रेटरी ने भी गांव के परिवार रजिस्टर में फरजाना का नाम सोना के रूप में दर्ज कैसे कर लिया। गांव के प्रधान ने भी बिना अच्छी तरह से जांच किए ही कुटुंब रजिस्टर के आधार निवास प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया। उधर, कोपागंज एसएसआई ज्ञान प्रकाश यादव का कहना है कि पासपोर्ट आवेदन की जांच रिपोर्ट तत्कालीन इंस्पेक्टर ने बनाई होगी।

इस प्रकरण में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है। इसमें यह जांच भी की जाएगी कि प्रथम दृष्टया किसके द्वारा फर्जीवाड़ा किया गया। इसके अलावा दस्तावेजों को बनाने में सहयोगी दस्तावेजों की भी गहनता से जांच की जाएगी। जो भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -सुशील घुले, पुलिस अधीक्षक, मऊ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed