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हिंदी साहित्य परिषद ने देवभष्कर को किया सारस्वत - सम्मान से सम्मानित
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मऊ। हिंदी साहित्य परिषद के तत्वाधान में मंगलवार को देर शाम हिंदी भवन में समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्य अध्यापक पुरस्कार - 2019 से अलंकृत किए गए देव भास्कर तिवारी प्रधानाचार्य डीएवी इंटर कॉलेज को अंगवस्त्रम एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर हिंदी साहित्य परिषद की तरफ से ऽसारस्वत - सम्मानऽ से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि रामनिवास राय ने कहा कि हिंदी राजभाषा से राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी। हमारी हिंदी भी बढ़ रही है। देव भास्कर तिवारी ने ऽसारस्वत - सम्मानऽ के लिए हिंदी साहित्य परिषद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी भाषा से हमारा वैर भाव नहीं है किंतु हिंदी हमारी अस्मिता की भाषा है। हमें इसे सर्वोच्च सम्मान देना चाहिए। शैलेश सिंह ने कहा कि हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं और बोलियों का विकास भारतीय संस्कृति के लिए बहुत जरूरी है। शशि प्रकाश राय ने कहा कि हिंदी समावेशी भाषा है।मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि हिंदी हमारी आत्मा है, हम हिंदी के सम्मान के बिना अपने आत्मसम्मान की रक्षा नहीं कर सकते। डॉ. शर्वेश पांडेय ने कहा कि क्रिया से भाषा की पहचान होती है ना कि शब्द से। हिंदी में विपुल कार्य हुआ है और इसके पास समृद्ध शब्द भंडार है। डॉ. चंद्र प्रकाश राय ने कहा कि भाषा के विकास में सत्ता का विशेष प्रभाव होता है। वर्तमान समय में हिंदी भाषा का आयाम उत्तरोत्तर बढ़ रहा है। इस अवसर पर जय नारायण द्विवेदी, पुष्पा तिवारी, अनुपमा तिवारी, जन्मेजय सिंह, डॉ. जितेंद्र राय, ऋषिकेश पांडेय, राजेंद्र राय, रामजी उपाध्याय, अभय सिंह, अमरनाथ मिश्र, देवेश राय, प्रमोद सिंह, आशुतोष तिवारी आदि शामिल रहे।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि रामनिवास राय ने कहा कि हिंदी राजभाषा से राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी। हमारी हिंदी भी बढ़ रही है। देव भास्कर तिवारी ने ऽसारस्वत - सम्मानऽ के लिए हिंदी साहित्य परिषद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी भाषा से हमारा वैर भाव नहीं है किंतु हिंदी हमारी अस्मिता की भाषा है। हमें इसे सर्वोच्च सम्मान देना चाहिए। शैलेश सिंह ने कहा कि हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं और बोलियों का विकास भारतीय संस्कृति के लिए बहुत जरूरी है। शशि प्रकाश राय ने कहा कि हिंदी समावेशी भाषा है।मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि हिंदी हमारी आत्मा है, हम हिंदी के सम्मान के बिना अपने आत्मसम्मान की रक्षा नहीं कर सकते। डॉ. शर्वेश पांडेय ने कहा कि क्रिया से भाषा की पहचान होती है ना कि शब्द से। हिंदी में विपुल कार्य हुआ है और इसके पास समृद्ध शब्द भंडार है। डॉ. चंद्र प्रकाश राय ने कहा कि भाषा के विकास में सत्ता का विशेष प्रभाव होता है। वर्तमान समय में हिंदी भाषा का आयाम उत्तरोत्तर बढ़ रहा है। इस अवसर पर जय नारायण द्विवेदी, पुष्पा तिवारी, अनुपमा तिवारी, जन्मेजय सिंह, डॉ. जितेंद्र राय, ऋषिकेश पांडेय, राजेंद्र राय, रामजी उपाध्याय, अभय सिंह, अमरनाथ मिश्र, देवेश राय, प्रमोद सिंह, आशुतोष तिवारी आदि शामिल रहे।
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