{"_id":"9dd5248602f34f75e1a2016363a9d95e","slug":"heavy-rain-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"फसलों के लिए बारिश अमृत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फसलों के लिए बारिश अमृत
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 19 Jan 2016 11:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ठंड में मंगलवार को दिनभर रिमझिम बारिश होने से जहां इजाफा हो गया। वहीं, किसानों के चेहरे खिल उठे। पूर्वांचल में कोल्ड फ्रंट के गुजरने की वजह से गलन बढ़ने से लोग बेहाल रहे।
इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कई सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था नहीं की जा सकी। रुक-रुक बारिश होने से लोग भीगते हुए गंतव्य स्थल की ओर से जाते देखा गया।
जनवरी माह के शुरुआत के समय से ही तापमान बढ़ने से किसानों को रबी फसल का उत्पादन प्रभावित होने की चिंता सताने लगी थी। मंगलवार को मौसम ने करवट लिया। तड़के से ही रिमझिम बारिश शुरू होने से किसानों के चेहरे पर चमक देखते ही बन रही थी।
विज्ञापन
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो बारिश फसलों के लिए अमृत बूंद साबित हो रही है। जिले में व्यापक पैमाने पर गेहूं की खेती की जाती है। लगभग 80 प्रतिशत किसानों ने गेहूं की पहली सिंचाई कर दी थी। जबकि दूसरी सिंचाई लगभग 40 प्रतिशत हुई है। बारिश के बाद खेतों में नमी 15 दिन तक बनी रहेगी।
इस संबंध में कृषि विशेषज्ञ तथा नेफोर्ड के जिला प्रभारी संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि तापमान के बढ़ने से रबी उत्पादन प्रभावित होने की संभावना बनी हुई थी। यह बारिश गेहूं, दहलन तथा तिलहन के लिए अमृत बूंद के समान है। फसलों की एक हल्की सिंचाई हो गई है।
बताया कि गेहूं की दूसरी सिंचाई करने पर पानी खेतों में लग जाता है। इससे फसल की ग्रोथ रुक जाती है। लेकिन फुहार जैसी बारिश होने से फसलों की ग्रोथ तेज होगी। रबी फसल की दूसरी सिंचाई 15 दिन तक टल जाएगी। उधर ठंड बढ़ जाने के बाद भी अलाव की व्यवस्था न होने से गरीबों का जीना दूभर हो गया है।
रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी अलाव की व्यवस्था न होने से लोगों का बुरा हाल रहा। जबकि जिला प्रशासन की ओर से प्रत्येक तहसीलों को 50-50 हजार रुपया महीनों पूर्व ही आवंटन कर दिया गया था। ठंड के बढ़ जाने से दूकानों पर गर्म कपड़ों को खरीदने के लिए भीड़ लगी रही।
वहीं, कागज पर एक दर्जन से अधिक सामाजिक स्तर पर कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाएं भी अलाव जलवाने के मामले में उदासीन नजर आ रही हैं।
विज्ञापन
इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कई सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था नहीं की जा सकी। रुक-रुक बारिश होने से लोग भीगते हुए गंतव्य स्थल की ओर से जाते देखा गया।
विज्ञापन
जनवरी माह के शुरुआत के समय से ही तापमान बढ़ने से किसानों को रबी फसल का उत्पादन प्रभावित होने की चिंता सताने लगी थी। मंगलवार को मौसम ने करवट लिया। तड़के से ही रिमझिम बारिश शुरू होने से किसानों के चेहरे पर चमक देखते ही बन रही थी।
विज्ञापन
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो बारिश फसलों के लिए अमृत बूंद साबित हो रही है। जिले में व्यापक पैमाने पर गेहूं की खेती की जाती है। लगभग 80 प्रतिशत किसानों ने गेहूं की पहली सिंचाई कर दी थी। जबकि दूसरी सिंचाई लगभग 40 प्रतिशत हुई है। बारिश के बाद खेतों में नमी 15 दिन तक बनी रहेगी।
इस संबंध में कृषि विशेषज्ञ तथा नेफोर्ड के जिला प्रभारी संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि तापमान के बढ़ने से रबी उत्पादन प्रभावित होने की संभावना बनी हुई थी। यह बारिश गेहूं, दहलन तथा तिलहन के लिए अमृत बूंद के समान है। फसलों की एक हल्की सिंचाई हो गई है।
बताया कि गेहूं की दूसरी सिंचाई करने पर पानी खेतों में लग जाता है। इससे फसल की ग्रोथ रुक जाती है। लेकिन फुहार जैसी बारिश होने से फसलों की ग्रोथ तेज होगी। रबी फसल की दूसरी सिंचाई 15 दिन तक टल जाएगी। उधर ठंड बढ़ जाने के बाद भी अलाव की व्यवस्था न होने से गरीबों का जीना दूभर हो गया है।
रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी अलाव की व्यवस्था न होने से लोगों का बुरा हाल रहा। जबकि जिला प्रशासन की ओर से प्रत्येक तहसीलों को 50-50 हजार रुपया महीनों पूर्व ही आवंटन कर दिया गया था। ठंड के बढ़ जाने से दूकानों पर गर्म कपड़ों को खरीदने के लिए भीड़ लगी रही।
वहीं, कागज पर एक दर्जन से अधिक सामाजिक स्तर पर कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाएं भी अलाव जलवाने के मामले में उदासीन नजर आ रही हैं।