{"_id":"5d31fd678ebc3e6ceb430f7c","slug":"health-mau-news-vns4737654105","type":"story","status":"publish","title_hn":"छ: महीने में ही दस हजार से ज्यादा लोगों के शिकार बनाया आवारा कुत्तों ने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छ: महीने में ही दस हजार से ज्यादा लोगों के शिकार बनाया आवारा कुत्तों ने
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मऊ। जिले में आवारा कुत्तों के अलावा सियार, बंदर, जंगली सूअरों का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। जिला अस्पताल के रैबिज इंजेक्शन लगवाने आने वाले मरीजों का आंकड़ा इस खतरनाक हालात को बयां कर रहे। साल के शुरुआती छह: माह में ही दस हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते अपना शिकार बना चुके हैं। बीते साल यह आंकड़ा करीब छह: हजार तक सिमटा हुआ था।
आवारा कुत्तों की संख्या पर किसी तरह का नियंत्रण न होने पर यह खतरनाक होते जा रहे। हालात कितने बदतर हो चुके हैं, इसका सहज अंदाजा जिला अस्पताल में इससे शिकार होकर रैबिज का इंजेक्शन लगाने के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या से लगाया जा सकता है। अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करते तो साल के शुरुआती 6 माह में अब तक 10373 लोग कुत्ते के काटे का इलाज कराने पहुंच चुके है। सूत्रों की माने तो यह आंकड़ा बीते साल छह: हजार ही था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा जिले के सीमावर्ती जिले गाजीपुर तथा बलिया जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों के इसमे शामिल होने की बात का उल्लेख किया है। बावजूद छह: माह में इतनी बड़ी संख्या में आवारा पशुओं के हमले की घटना जरूर चौंकाने वाली है। जबकि 18 जुलाई तक एक हजार से ज्यादा मरीजों को रैबिज का इंजेक्शन लगाया जा चुका है।
मऊ। अस्पताल सूत्रों की माने तो यह आंकड़ा 12 हजार से पार हो सकता था, लेकिन बीच में एक माह तक इंजेक्शन न होने से आने वाले मरीज बैरंग लौट गए। बताया कि जनवरी 2019 में 2 जनवरी से 22 जनवरी तक इंजेक्शन नहीं था, जबकि फरवरी में एक फरवरी से 11 फरवरी तक इंजेक्शन का स्टॉक खत्म होने पर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा था।
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मऊ। आवारा पशुओं के शिकार मरीजों की संख्या की आंकड़े देखे तो सबसे ज्यादा मरीज फरवरी माह में आए, जबकि जून माह में सबसे कम पहुंचे। जनवरी में 1569, फरवरी में 2280, मार्च में 1780, अप्रैल में 1522, मई में 1832 और जून में 1380 मरीजों को एंटी रैबिज का इंजेक्शन लगाया गया।
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आवारा कुत्तों की संख्या पर किसी तरह का नियंत्रण न होने पर यह खतरनाक होते जा रहे। हालात कितने बदतर हो चुके हैं, इसका सहज अंदाजा जिला अस्पताल में इससे शिकार होकर रैबिज का इंजेक्शन लगाने के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या से लगाया जा सकता है। अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करते तो साल के शुरुआती 6 माह में अब तक 10373 लोग कुत्ते के काटे का इलाज कराने पहुंच चुके है। सूत्रों की माने तो यह आंकड़ा बीते साल छह: हजार ही था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा जिले के सीमावर्ती जिले गाजीपुर तथा बलिया जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों के इसमे शामिल होने की बात का उल्लेख किया है। बावजूद छह: माह में इतनी बड़ी संख्या में आवारा पशुओं के हमले की घटना जरूर चौंकाने वाली है। जबकि 18 जुलाई तक एक हजार से ज्यादा मरीजों को रैबिज का इंजेक्शन लगाया जा चुका है।
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मऊ। अस्पताल सूत्रों की माने तो यह आंकड़ा 12 हजार से पार हो सकता था, लेकिन बीच में एक माह तक इंजेक्शन न होने से आने वाले मरीज बैरंग लौट गए। बताया कि जनवरी 2019 में 2 जनवरी से 22 जनवरी तक इंजेक्शन नहीं था, जबकि फरवरी में एक फरवरी से 11 फरवरी तक इंजेक्शन का स्टॉक खत्म होने पर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा था।
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मऊ। आवारा पशुओं के शिकार मरीजों की संख्या की आंकड़े देखे तो सबसे ज्यादा मरीज फरवरी माह में आए, जबकि जून माह में सबसे कम पहुंचे। जनवरी में 1569, फरवरी में 2280, मार्च में 1780, अप्रैल में 1522, मई में 1832 और जून में 1380 मरीजों को एंटी रैबिज का इंजेक्शन लगाया गया।