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मेहमान पक्षियों को निशाना बना रहे हैं शिकारी
mau
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:40 AM IST
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मधुबन में मारे गए प्रवासी साइबेरियन पक्षी।
- फोटो : mau
कोतवाली क्षेत्र के मधुबन-बेल्थरा मार्ग स्थित फ़तहपुर ताल रतोय पर साइबेरियन पक्षियों का आना शुरू हो गया है। इनके कलरव से लोग इन्हें देखने पहुंचने लगे हैं। लेकिन इनके आगमन के साथ ही इनका शिकार भी शुरू हो गया है। वहीं जिम्मेदार वन विभाग और पुलिस प्रशासन के लोग शिकारियों पर कार्रवाई को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। नतीजतन, बेजुबान मेहमान पक्षियों को शिकारी खुले आम बंदूकों को निशान बना रहे।
यह मेहमान पक्षी अक्तूबर माह के आखिरी सप्ताह से आने लगते हैं और फरवरी तक रहते हैं। तहसील क्षेत्र का प्रसिद्ध ताल रतोय और खदरा इन दिनों सायबेरियन पक्षियों के शिकार को लेकर सुर्खियों में है। यहा पक्षियों के आने से शिकारियों की बंदूकें सक्रिय हो गई हैं। इन मेहमान पक्षियों को शिकारी बंदूक से, जाल लगाकर और जहरमिश्रित चारे खिला शिकार कर रहे हैं। इन तरीकों में जाल और जहर खुरानी से ज्यादा पक्षियों को मारा जा रहा। पेशेवर शिकारी कारतूस महंगा होने के कारण टोपीदार बंदूक का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्षेत्र के फ़तह पुर ककराडीह, उतराई, इमामबाड़ा, देवसी पुर, पटियवा आदि गांव के शिकारी सारे नियम कानून को ताक पर रख कर रात के अंधेरे में शिकार कर रहे।
इन मेहमान पक्षियों में टिकवा, लालसर, मलका, मलुकी, लौकडा, कसैली, धनाअर्जुन आदि पक्षी तालों में बसेरा कर रहे। शिकारी इन पक्षियों को खुलेआम 200 से 500 रुपये में बाजारो में घूम कर बेचते हैं। वन विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे। लोगों की मानें तो इनके संज्ञान में शिकार की बात है। लेकिन लापरवाही के चलते यह कार्रवाई नहीं कर रहे। नतीजतन, बेजुबान मेहमान पक्षी यहां आते ही बंदूकों का शिकार हो जा रहे। डीएफओ संजय विस्वाल ऐसी किसी जानकारी के प्रति अनभिज्ञता जताते हैं। उधर एएसपी एसके श्रीवास्तव ने बताया कि इस संबंध में संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर को दिशा निर्देश जाएगा।
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यह मेहमान पक्षी अक्तूबर माह के आखिरी सप्ताह से आने लगते हैं और फरवरी तक रहते हैं। तहसील क्षेत्र का प्रसिद्ध ताल रतोय और खदरा इन दिनों सायबेरियन पक्षियों के शिकार को लेकर सुर्खियों में है। यहा पक्षियों के आने से शिकारियों की बंदूकें सक्रिय हो गई हैं। इन मेहमान पक्षियों को शिकारी बंदूक से, जाल लगाकर और जहरमिश्रित चारे खिला शिकार कर रहे हैं। इन तरीकों में जाल और जहर खुरानी से ज्यादा पक्षियों को मारा जा रहा। पेशेवर शिकारी कारतूस महंगा होने के कारण टोपीदार बंदूक का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्षेत्र के फ़तह पुर ककराडीह, उतराई, इमामबाड़ा, देवसी पुर, पटियवा आदि गांव के शिकारी सारे नियम कानून को ताक पर रख कर रात के अंधेरे में शिकार कर रहे।
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इन मेहमान पक्षियों में टिकवा, लालसर, मलका, मलुकी, लौकडा, कसैली, धनाअर्जुन आदि पक्षी तालों में बसेरा कर रहे। शिकारी इन पक्षियों को खुलेआम 200 से 500 रुपये में बाजारो में घूम कर बेचते हैं। वन विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे। लोगों की मानें तो इनके संज्ञान में शिकार की बात है। लेकिन लापरवाही के चलते यह कार्रवाई नहीं कर रहे। नतीजतन, बेजुबान मेहमान पक्षी यहां आते ही बंदूकों का शिकार हो जा रहे। डीएफओ संजय विस्वाल ऐसी किसी जानकारी के प्रति अनभिज्ञता जताते हैं। उधर एएसपी एसके श्रीवास्तव ने बताया कि इस संबंध में संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर को दिशा निर्देश जाएगा।
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