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Mau News: सरकारी और निजी अस्पतालों पर लटका रहा ताला, इमरजेंसी में ही हुआ इलाज
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पश्चिम बंगाल के मेडिकल कॉलेज में महिला रेजिडेंट की दुष्कर्म और हत्या के विरोध में शनिवार को आईएमए के डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल किया। शनिवार की सुबह छह बजे से रविवार की सुबह 6 बजे तक ओपीडी को बंद रखा। जिला अस्पताल के गेट पर एकत्र होने के बाद चिकित्सक वी वांट जस्टिस के नारे के साथ पैदल कलेक्ट्रेट परिसर गए, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र को सौंपा। हालांकि इस दौरान आपात सेवाएं चालू रहीं।
चिकित्सकों की हड़ताल को नर्सिंग की प्रशिक्षुओं का भी समर्थन मिला। जिला अस्पताल में प्रशिक्षण करने वालों ने काला पट्टी लगाकर समर्थन किया। चिकित्सकों के हड़ताल का जिले में मिला जुला असर देखने को मिला। शहर के सभी प्रमुख अस्पतालों के गेट पर ताला बंद था। पूरे दिन भीड़ भाड़ वाले जिला अस्पताल में भी सन्नाटा पसरा था। यहां आने वाले मरीजों का उपचार सिर्फ जिला अस्पताल में ही किया गया। चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर शुक्रवार को प्रेसवार्ता का आयोजन कर जानकारी दी गई थी। जिससे निजी अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पतालों में बहुत कम मरीज आए थे। हालांकि कुछ मरीज और तीमारदार जिनको हड़ताल की जानकारी नहीं थी, वह आकर परेशान हुए।
आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. पीएल गुप्ता ने महिलाओं एवं चिकित्सकों के प्रति हो रहे जघन्य अपराधों के खिलाफ संवेदनशील और सतर्क होकर कार्य करने के लिए अनुरोध किया। सरकार से मेडिकल प्रोटेक्शन बिल जिसमें अस्पताल के डॉक्टर और समस्त स्टाफ की सुरक्षा शत प्रतिशत करने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालाें में डॉ. सीएस साहनी, डॉ. अमित रंजन, डॉ. संजय सिंह, डॉ. एसएन राय, डॉ. जेड आई उस्मानी, डॉ. आरएन मिश्रा, डॉ. एचएन सिंह, डॉ. अजीत कुमार सिंह, डॉ. आरके अग्रवाल, डॉ. प्रतिमा सिंह, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. योगेंद्र यादव मौजूद थे।
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बलिया से अपने बेटी के चिकित्सकीय परामर्श के लिए आए पिंटू गिरी ने कहा कि हड़ताल की जानकारी नहीं थी। बेटी को दिखाने के लिए आया था। वहीं हलधरपुर से आए बिजय यादव खुद के उपचार के लिए आए थे। लेकिन चिकित्सकों के हड़ताल पर होने से बैरंग लौट गए। यही हाल बिनोद शर्मा और सुधीर मद्धेशिया का था। वह दोनाें भी बिना परामर्श के ही लौट गए।
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चिकित्सकों की हड़ताल को नर्सिंग की प्रशिक्षुओं का भी समर्थन मिला। जिला अस्पताल में प्रशिक्षण करने वालों ने काला पट्टी लगाकर समर्थन किया। चिकित्सकों के हड़ताल का जिले में मिला जुला असर देखने को मिला। शहर के सभी प्रमुख अस्पतालों के गेट पर ताला बंद था। पूरे दिन भीड़ भाड़ वाले जिला अस्पताल में भी सन्नाटा पसरा था। यहां आने वाले मरीजों का उपचार सिर्फ जिला अस्पताल में ही किया गया। चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर शुक्रवार को प्रेसवार्ता का आयोजन कर जानकारी दी गई थी। जिससे निजी अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पतालों में बहुत कम मरीज आए थे। हालांकि कुछ मरीज और तीमारदार जिनको हड़ताल की जानकारी नहीं थी, वह आकर परेशान हुए।
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आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. पीएल गुप्ता ने महिलाओं एवं चिकित्सकों के प्रति हो रहे जघन्य अपराधों के खिलाफ संवेदनशील और सतर्क होकर कार्य करने के लिए अनुरोध किया। सरकार से मेडिकल प्रोटेक्शन बिल जिसमें अस्पताल के डॉक्टर और समस्त स्टाफ की सुरक्षा शत प्रतिशत करने की मांग की गई। ज्ञापन देने वालाें में डॉ. सीएस साहनी, डॉ. अमित रंजन, डॉ. संजय सिंह, डॉ. एसएन राय, डॉ. जेड आई उस्मानी, डॉ. आरएन मिश्रा, डॉ. एचएन सिंह, डॉ. अजीत कुमार सिंह, डॉ. आरके अग्रवाल, डॉ. प्रतिमा सिंह, डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. योगेंद्र यादव मौजूद थे।
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बलिया से अपने बेटी के चिकित्सकीय परामर्श के लिए आए पिंटू गिरी ने कहा कि हड़ताल की जानकारी नहीं थी। बेटी को दिखाने के लिए आया था। वहीं हलधरपुर से आए बिजय यादव खुद के उपचार के लिए आए थे। लेकिन चिकित्सकों के हड़ताल पर होने से बैरंग लौट गए। यही हाल बिनोद शर्मा और सुधीर मद्धेशिया का था। वह दोनाें भी बिना परामर्श के ही लौट गए।