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Mau News: घोसी सांसद ने कहा- बिना सहमति के लगाए गए 1.35 लाख मीटर, सीबीआई जांच हो
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राजीव राय । सांसद
मऊ। जिले में स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाने का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मंगलवार की देर शाम अपने घोसी के सपा सांसद राजीव राय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर बिजली निगम के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि जिले में करीब 1.35 लाख उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए गए हैं। सांसद ने पूरे मामले में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों एवं संबंधित निजी कंपनियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
सांसद ने अपने पोस्ट में कहा कि 2 अप्रैल 2026 को लोकसभा में प्रश्न संख्या 541 के उत्तर में केंद्रीय विद्युत मंत्री ने स्पष्ट किया था कि प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगवाना उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य नहीं है।
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इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए गए और उन्हें यह कहकर लगाया गया कि यह सरकार का अनिवार्य आदेश है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से अधिक बिजली दर्ज कर रहे हैं, जिससे उन्हें अधिक बिजली बिल मिल रहे हैं।
इससे मीटरों की सटीकता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि जिन निजी कंपनियों को स्मार्ट मीटर की आपूर्ति और स्थापना का कार्य सौंपा गया है, उनके पास इस क्षेत्र का अपेक्षित अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता नहीं है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और गुणवत्ता संदेह के घेरे में है।
सांसद ने मांग की कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना लगा स्मार्ट प्री-पेड मीटर हटाए जाएं, जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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उन्होंने दावा किया कि जिले में करीब 1.35 लाख उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए गए हैं। सांसद ने पूरे मामले में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों एवं संबंधित निजी कंपनियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
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सांसद ने अपने पोस्ट में कहा कि 2 अप्रैल 2026 को लोकसभा में प्रश्न संख्या 541 के उत्तर में केंद्रीय विद्युत मंत्री ने स्पष्ट किया था कि प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगवाना उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य नहीं है।
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इसके बावजूद जिले में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए गए और उन्हें यह कहकर लगाया गया कि यह सरकार का अनिवार्य आदेश है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से अधिक बिजली दर्ज कर रहे हैं, जिससे उन्हें अधिक बिजली बिल मिल रहे हैं।
इससे मीटरों की सटीकता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि जिन निजी कंपनियों को स्मार्ट मीटर की आपूर्ति और स्थापना का कार्य सौंपा गया है, उनके पास इस क्षेत्र का अपेक्षित अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता नहीं है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और गुणवत्ता संदेह के घेरे में है।
सांसद ने मांग की कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना लगा स्मार्ट प्री-पेड मीटर हटाए जाएं, जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।