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Mau News: गजल ने किया मंत्रमुग्ध तो हास्य कवियों ने गुदगुदाया
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नगर के पुरानी तहसील स्थित एक निजी स्कूल में सोमवार की देर शाम उत्तर प्रदेश साहित्य की जिला इकाई द्वारा काव्य संध्या और परिचय सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें हस्य कवियों ने अपनी कविता से लोगों को खूब गुदगुदाया तो कुछ गीतों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डा. कमलेश राय और उद्घाटन साहित्य सभा के जिला संरक्षक एडवोकेट वीरेंद्र बहादुर पाल ने किया।
विशाल पांडेय ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरूआत की। गजलकार हरिलाल कृषक ने वृद्धों की देखभाल पे भी बात कुछ करो, फिर बाद उसके करना जवानी पे शायरी, सुनाकर युवाओं को बुजुर्गों की वेदना का बोध कराया। युवा कवि लाल बहादुर सिंह ने गंगा यमुना बहती रहती भारत की जिस माटी में, आतंकी कब कैसे पनपे केसर वाली घाटी में सुनाकर खूब तालियां बटोरी।डीसीएसके के प्रोफेसर डा. सूर्यभूषण द्विवेदी ने बाती की सुगंध बता रही है दिया अभी अभी बुझा है, सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
कृष्णदेव घायल ने बात मानी न मानी कहे के परल, दर्द जिंदगी क सगरो सहे के परल। हास्य कवि अजय कुमार सिंह की कविता - कुल अपनय त हौ, लूटता न सुनाकर लोगों को खूब हसाया। वहीं अश्क चिरैयाकोटी ने अपने सामाजिक परिवेश पर करारा प्रहार करते हुए सुनाया कि आये भी सच बाहर तो कैसे आये, अंदर अंदर झूठ का ताना-बाना है। साहित्य सभा के जिलाध्यक्ष डा. कमलेश राय ने बहू बनी बेटी के दर्द को रेखांकित करते हुए कविता सुनाई। इस दौरान मनोज कुमार सिंह, सुरेंद्र सिंह, मृत्युंजय तिवार आदि उपस्थित रहे।
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विशाल पांडेय ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरूआत की। गजलकार हरिलाल कृषक ने वृद्धों की देखभाल पे भी बात कुछ करो, फिर बाद उसके करना जवानी पे शायरी, सुनाकर युवाओं को बुजुर्गों की वेदना का बोध कराया। युवा कवि लाल बहादुर सिंह ने गंगा यमुना बहती रहती भारत की जिस माटी में, आतंकी कब कैसे पनपे केसर वाली घाटी में सुनाकर खूब तालियां बटोरी।डीसीएसके के प्रोफेसर डा. सूर्यभूषण द्विवेदी ने बाती की सुगंध बता रही है दिया अभी अभी बुझा है, सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
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कृष्णदेव घायल ने बात मानी न मानी कहे के परल, दर्द जिंदगी क सगरो सहे के परल। हास्य कवि अजय कुमार सिंह की कविता - कुल अपनय त हौ, लूटता न सुनाकर लोगों को खूब हसाया। वहीं अश्क चिरैयाकोटी ने अपने सामाजिक परिवेश पर करारा प्रहार करते हुए सुनाया कि आये भी सच बाहर तो कैसे आये, अंदर अंदर झूठ का ताना-बाना है। साहित्य सभा के जिलाध्यक्ष डा. कमलेश राय ने बहू बनी बेटी के दर्द को रेखांकित करते हुए कविता सुनाई। इस दौरान मनोज कुमार सिंह, सुरेंद्र सिंह, मृत्युंजय तिवार आदि उपस्थित रहे।
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