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घटने लगी घाघरा , लोगों ने ली राहत की सांस
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दोहरीघाट/दुबारी। घाघरा नदी का जलस्तर बुुधवार को घटाव पर रहा। जलस्तर में 15 सेटीमींटर की गिरावट दर्ज की गई। इससे लोगो ने राहत की सांस ली है। बुुधवार को शंकरघाट पर घाघरा का जलस्तर 69.60मीटर रहा। जबकि मंगलवार को जलस्तर 69.75 मीटर पर था । इस तरह 24 घण्टे में घाघरा का जलस्तर 15 सेमी घटा। जलस्तर घटने से नगर सहित तटवर्ती इलाके के लोगो ने राहत की सांस ली है।
जानकारों का मानना हैै कि लेकिन अभी खतरा टला नही है क्योकि नदी कभी भी बढ सकती है। गोरीशंकर घाट पर खतरा बिन्दु69.90 मीटर है। नदी खतरा बिंदु से 30 सेमी नीचे बह रही थी। उधर देवारांचल मेें जलस्तर लगातार घट रहा है।सभी गाँव के संपर्क मार्गो से घाघरा के बाढ़ का पानी उतर गया है। इससे बाढ़ पीड़ितों को आने जाने में काफी राहत मिली फिर भी मार्गो पर कीचड़ भरा हुआ है ,लेकिन देेवारावासी उन्हीं कीचड़ भरे रास्तों से आ जा रहे हैं। उधर मधुबन तहसील क्षेत्र के परसिया जयराम गिरि के हाहा नाला रेगुलेटर पर बुधवार को जलस्तर 65.40 पर पहुुंच गया।
अब ज्यों ज्यों खेतों से पानी निकल रहा है , त्यों त्यों बाढ़ पीड़ित किसानों की अपने खेतों मेें फसलों की बरबादी देख कर आखों से आसू निकल रहे हैं। किसानों की इस साल की पूरी लागत पूजी बर्बाद हो गयी है। बाढ़ से धान गन्ना बाजरा की फसलें गल गयी है और ज्यों ज्यों खेतों से पानी निकल रहा है त्यों फसलें जमीन गिर जा रही हैं। बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में कोरोना महामारी के चलते घर के सभी सदस्य घर रहने केे कारण किसानों ने इस साल पूूरे मनोयोग से खेती किया था लेकिन बाढ़ ने उनकेे मनसूबों पर पानी फेर दिया।बाढ़ क्षेत्र में लगभग सभी पुरवो के मार्गो से पानी हटा और अब बाढ़ पीड़ितों को पशुओं के लिए चारा की समस्या स्वास्थ की समस्या मार्ग मरम्मत की समस्या आदि बनी हुई है।
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जानकारों का मानना हैै कि लेकिन अभी खतरा टला नही है क्योकि नदी कभी भी बढ सकती है। गोरीशंकर घाट पर खतरा बिन्दु69.90 मीटर है। नदी खतरा बिंदु से 30 सेमी नीचे बह रही थी। उधर देवारांचल मेें जलस्तर लगातार घट रहा है।सभी गाँव के संपर्क मार्गो से घाघरा के बाढ़ का पानी उतर गया है। इससे बाढ़ पीड़ितों को आने जाने में काफी राहत मिली फिर भी मार्गो पर कीचड़ भरा हुआ है ,लेकिन देेवारावासी उन्हीं कीचड़ भरे रास्तों से आ जा रहे हैं। उधर मधुबन तहसील क्षेत्र के परसिया जयराम गिरि के हाहा नाला रेगुलेटर पर बुधवार को जलस्तर 65.40 पर पहुुंच गया।
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अब ज्यों ज्यों खेतों से पानी निकल रहा है , त्यों त्यों बाढ़ पीड़ित किसानों की अपने खेतों मेें फसलों की बरबादी देख कर आखों से आसू निकल रहे हैं। किसानों की इस साल की पूरी लागत पूजी बर्बाद हो गयी है। बाढ़ से धान गन्ना बाजरा की फसलें गल गयी है और ज्यों ज्यों खेतों से पानी निकल रहा है त्यों फसलें जमीन गिर जा रही हैं। बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में कोरोना महामारी के चलते घर के सभी सदस्य घर रहने केे कारण किसानों ने इस साल पूूरे मनोयोग से खेती किया था लेकिन बाढ़ ने उनकेे मनसूबों पर पानी फेर दिया।बाढ़ क्षेत्र में लगभग सभी पुरवो के मार्गो से पानी हटा और अब बाढ़ पीड़ितों को पशुओं के लिए चारा की समस्या स्वास्थ की समस्या मार्ग मरम्मत की समस्या आदि बनी हुई है।
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