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Mau News: हत्या के दोषी बाप-बेटे सहित चार को आजीवन कारावास
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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अशोक कुमार ने पुरानी रंजिश को लेकर 27 वर्ष पूर्व रामचंद्र की हुई हत्या के मामले में दोषी बाप-बेटे सहित चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाया।
वहीं प्रत्येक पर 26500-26500 रुपये जुर्माना भी लगाया। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार जहनियापुर गांव निवासिनी सुनीता देवी पत्नी रामचंद्र की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें गांव के ही रामनाथ और श्यामनाथ पुत्रगण निर्मल, निर्मल पुत्र कुमार और बांके पुत्र खरपत्तू को नामजद किया गया।
वादिनी का आरोप था कि पुरानी रंजिश को लेकर 13 नवंबर 2007 सभी एक राय होकर लाठी डंडे और तमंचे से घर पर धावा बोल दिए और उसके पति रामचंद्र को मारने पीटने लगे।
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पति भाग कर घर में गए तो फायरिंग करते हुए घर में घुस गए और उसके पति रामचंद्र को गोली मार दी। इस दौरान उन्हें बचाने शैलेश, सूर्यभान, सुरेंद्र व श्रीराम आए तो सभी आरोपी उन्हें भी मारपीट कर घायल कर दिए। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए कुल 11 गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद रामनाथ, श्यामनाथ, निर्मल व बांके को हत्या, घर में घुसकर मारपीट करना, बलवा के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाते हुए सभी को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही जुर्माना लगाया। घर में घुसकर मारपीट करने के मामले में सात-सात वर्ष की सजा के साथ ही 5-5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। मारपीट के मामले में एक-एक वर्ष की सजा, बलवा के मामले में दो-दो वर्ष की सजा के साथ ही 5-5 सौ रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं घातक हथियार से लैस होकर बलवा करने के मामले में तीन-तीन वर्ष की सजा के साथ ही एक-एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
अभियुक्त श्यामनाथ को आयुध अधिनियम का दोषी पाते हुए 2 वर्ष की सजा के साथ ही 2 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड जमा हो जाने पर 75 प्रतिशत धनराशि मृतक रामचंद्र की पत्नी को देने का आदेश दिया।
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वहीं प्रत्येक पर 26500-26500 रुपये जुर्माना भी लगाया। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार जहनियापुर गांव निवासिनी सुनीता देवी पत्नी रामचंद्र की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें गांव के ही रामनाथ और श्यामनाथ पुत्रगण निर्मल, निर्मल पुत्र कुमार और बांके पुत्र खरपत्तू को नामजद किया गया।
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वादिनी का आरोप था कि पुरानी रंजिश को लेकर 13 नवंबर 2007 सभी एक राय होकर लाठी डंडे और तमंचे से घर पर धावा बोल दिए और उसके पति रामचंद्र को मारने पीटने लगे।
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पति भाग कर घर में गए तो फायरिंग करते हुए घर में घुस गए और उसके पति रामचंद्र को गोली मार दी। इस दौरान उन्हें बचाने शैलेश, सूर्यभान, सुरेंद्र व श्रीराम आए तो सभी आरोपी उन्हें भी मारपीट कर घायल कर दिए। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए कुल 11 गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद रामनाथ, श्यामनाथ, निर्मल व बांके को हत्या, घर में घुसकर मारपीट करना, बलवा के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाते हुए सभी को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही जुर्माना लगाया। घर में घुसकर मारपीट करने के मामले में सात-सात वर्ष की सजा के साथ ही 5-5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। मारपीट के मामले में एक-एक वर्ष की सजा, बलवा के मामले में दो-दो वर्ष की सजा के साथ ही 5-5 सौ रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं घातक हथियार से लैस होकर बलवा करने के मामले में तीन-तीन वर्ष की सजा के साथ ही एक-एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
अभियुक्त श्यामनाथ को आयुध अधिनियम का दोषी पाते हुए 2 वर्ष की सजा के साथ ही 2 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड जमा हो जाने पर 75 प्रतिशत धनराशि मृतक रामचंद्र की पत्नी को देने का आदेश दिया।