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वन विभाग लगाएगा 50 हजार ऑक्सीजन उगलने वाले पौधे:

Mon, 31 May 2021 11:25 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 31 May 2021 11:25 PM IST
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Forest Department will plant 50 thousand oxygen extracted plants
मऊ। कोरोना संक्रमण काल में वन विभाग ज्यादा ऑक्सीजन डिस्चार्ज करने तथा भूजल बरकरार रखने वाले 50 हजार पौधे लगाएगा। जिले की 16 सरकारी नर्सरियों में पीपल, बरगद, नीम, गुलर आदि पौधों को तैयार किया गया है। गत वर्ष के सापेक्ष पांच गुनाआक्सीजन डिस्चार्ज करने वाले पौधों के रोपण करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे हरियाली बनी रहेगी। शुद्ध वायु से मानव जीवन स्वस्थ रहेगा।
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जिले में कोरोना के मरीजों की ऑक्सीजन संबंधी दिक्कतों को देखते हुए जहां लोगों की जागरूकता बढ़ी है। जहां लोग ज्यादा आक्सीजन उगलने वाले पौधों का रोपण करने को तरजीह दे रहे हैं। इस वर्ष वन विभाग की तरफ से 25 लाख पौधरोपण करने का लक्ष्य बनाया गया है। वन विभाग जुलाई माह से शुरू होने वाले पौधरोपण अभियान के तहत भूजल बरकरार रखने तथा ज्यादा ऑक्सीजन डिस्चार्ज करने वाले पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, गुलर आदि के 50 हजार पौधे लगाएगा।
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जिले की 16 सरकारी नर्सरियों में इन पौधों को तैयार किया गया है। गत वर्ष पीपल, बरगद, पाकड़, नीम, गुलर के मात्र 10 हजार पौधे ही लगाए गए थे। वन विभाग की नर्सरियों में सहजन, शहतूत, इलाहाबादी अमरूद, शंकर सागौन, शीशम, नीम, सिरिस, लीची, आम, आंवला, नींबू, महुआ, गुलमोहर, जामुन, पीपल, पाकड़, बरगद, गुलर आदि की डिमांड बढ़ी है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो बरगद, शीशम, पीपल, आम आदि पेड़ों की जड़ें भूमि में सीधी नीचे तक फैली होती है। जड़े भूजल को बरकरार रखने के लिए सहायक होती है। ऑक्सीजन बनाने का काम पेड़ की पत्तियां करती हैं जो एक घंटे में पांच मिलीलीटर ऑक्सीजन बनाती हैं। इसलिए जिस पेड़ में ज्यादा पत्तियां होती हैं वह पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन बनाता है।
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पीपल का पेड़ अन्य पेड़ों के मुकाबले ज्यादा ऑक्सीजन देता है। 22 घंटे से भी ज्यादा समय तक ऑक्सीजन देता है। नीम, बरगद एक दिन में 20 घंटों से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं। इस बाबत प्रभागीय निदेेशक सामाजिक वानिकी संजय विश्वाल का कहना है कि पौधरोपण अभियान के तहत इस वर्ष ज्यादा ऑक्सीजन डिस्चार्ज करने वाले बरगद, नीम, गुलर आदि 50 हजार पौधों का रोपण कराया जाएगा। सनातन धर्म में बरगद, पीपल एवं पाकड़ के पौधे को एक साथ लगाए जाए तो इनको जटाशंकरी कहा जाता है। जटाशंकरी के दर्शन से तीर्थ का पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है। ऐसे में इन तीनों प्रजाति के पौधों की मांग सर्वाधिक रही है।
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