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गाजे बाजे के साथ निकाली कलश यात्रा
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Tue, 10 Mar 2015 11:20 PM IST
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क्षेत्र के गौहरपुर गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय
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नवचंडी महायज्ञ के क्रम में मंगलवार को श्रद्धालुआें ने गाजे बाजे के साथ
कलश यात्रा निकाली। इसमें शामिल श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण
गुंजायमान हो गया।
कलश यात्रा में पीले वस्त्र धारण की हुई कुंवारी कन्याएं व महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुए मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं।
यज्ञकर्ता अखिलेश ब्रह्मचारी के नेतृत्व में निकाली कलश यात्रा में श्रद्धालुओं का हुजूम गौहरपुर, कोइरियापार बाजार सहित विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करता हुआ एकौना घाट स्थित तमसा तट पहुंचा।
वहां से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कलश में जल भरा गया। इस दौरान जुलूस में शामिल लोग बीच-बीच में देवी देवताओं के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। जुलूस को देखने के लिए सड़क के दोनाें तरफ भारी संख्या में लोग खडे़ रहे। विधि विधान से कलश में जल भरने के बाद जुलूस यज्ञ स्थल पहुंचा।
इस अवसर पर यज्ञकर्ता अखिलेश ब्रह्मचारी ने कहा कि यज्ञ में भावभरी आहुतियां देने से एक तरफ जहां व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। वहीं दूसरी तरफ समाज में आपसी सौहार्द व भाईचारा की भावना का विकास होता है।
कहा कि कलश रूपी शक्ति को धारण करने के लिए नारियां ही उपयुक्त है। क्योंकि देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन के समय 14 रत्नों मेें एक रत्न अमृत कलश था। जिसे भगवान ने विश्वमोहिनी का रूप धारण कर अमृत कलश को सिर पर धारण किया था। कलश यात्रा जुलूस को सफल बनाने में अमरेश यादव, रामबदन, सदानंद, अमरजीत, उमेश कुमार आदि का योगदान रहा।
कलश यात्रा में पीले वस्त्र धारण की हुई कुंवारी कन्याएं व महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुए मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं।
यज्ञकर्ता अखिलेश ब्रह्मचारी के नेतृत्व में निकाली कलश यात्रा में श्रद्धालुओं का हुजूम गौहरपुर, कोइरियापार बाजार सहित विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करता हुआ एकौना घाट स्थित तमसा तट पहुंचा।
वहां से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कलश में जल भरा गया। इस दौरान जुलूस में शामिल लोग बीच-बीच में देवी देवताओं के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। जुलूस को देखने के लिए सड़क के दोनाें तरफ भारी संख्या में लोग खडे़ रहे। विधि विधान से कलश में जल भरने के बाद जुलूस यज्ञ स्थल पहुंचा।
इस अवसर पर यज्ञकर्ता अखिलेश ब्रह्मचारी ने कहा कि यज्ञ में भावभरी आहुतियां देने से एक तरफ जहां व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। वहीं दूसरी तरफ समाज में आपसी सौहार्द व भाईचारा की भावना का विकास होता है।
कहा कि कलश रूपी शक्ति को धारण करने के लिए नारियां ही उपयुक्त है। क्योंकि देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन के समय 14 रत्नों मेें एक रत्न अमृत कलश था। जिसे भगवान ने विश्वमोहिनी का रूप धारण कर अमृत कलश को सिर पर धारण किया था। कलश यात्रा जुलूस को सफल बनाने में अमरेश यादव, रामबदन, सदानंद, अमरजीत, उमेश कुमार आदि का योगदान रहा।