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नाइट ब्लड सैंपल सर्वे कर खोजे जा रहे फाइलेरिया रोगी
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मऊ। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में लोगों को फाइलेरिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्वे कर रात में सैंपल लिया जा रहा है। फायलेरिया रोग से ग्रसित मरीजों की खोज के लिए रात के समय में रक्त के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। जांच में पाजिटिव पाए जाने पर विभाग मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से निशुल्क इलाज किया जाएगा।
जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के तहत शहर के दो वार्ड मलिक ताहिरपुरा और मलिक कासिम पुरा सहित छह ब्लाक बड़रांव, दोहरीघाट, फतहपुर मंडाव, घोसी, कोपागंज तथा रतनपुरा से पांच-पांच सौ रक्त का नमूना लेने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए टीमेें रात में 8:30 बजे से अर्धरात्रि 12 बजे तक लोगों का सैंपल ले रही हैं। विभाग द्वारा चार हजार स्लाइड तैयार करना है। इसके लिए प्रत्येक गांव से 15 से 20 सैंपल लिया जा रहा है।
बताया कि रात के समय फायलेरिया के वायरस अधिक सक्रिय होते हैं, इसलिए रात के समय में ही सैंपल लिया जाता है। जनपद में वर्ष 2019-20 में लगभग 1300 फाइलेरिया के मरीज पंजीकृत थे। जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीजों का इलाज विभाग की तरफ से मुफ्त किया जाता है। मरीज को पहले साल में चार बार दवा खिलाई जाती है। जबकि दूसरे साल में तीन बार तथा तीसरे साल में दो बार दवाई खिलाई जाती है। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि यह रोग मच्छर के काटने से होता है। लेकिन दवा खाकर इस रोग को हराया जा सकता है। हर साल एक बार राष्ट्रीय स्तर पर मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम के तहत फायलेरिया के रोगियों को खोजा जाता है।
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जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के तहत शहर के दो वार्ड मलिक ताहिरपुरा और मलिक कासिम पुरा सहित छह ब्लाक बड़रांव, दोहरीघाट, फतहपुर मंडाव, घोसी, कोपागंज तथा रतनपुरा से पांच-पांच सौ रक्त का नमूना लेने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए टीमेें रात में 8:30 बजे से अर्धरात्रि 12 बजे तक लोगों का सैंपल ले रही हैं। विभाग द्वारा चार हजार स्लाइड तैयार करना है। इसके लिए प्रत्येक गांव से 15 से 20 सैंपल लिया जा रहा है।
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बताया कि रात के समय फायलेरिया के वायरस अधिक सक्रिय होते हैं, इसलिए रात के समय में ही सैंपल लिया जाता है। जनपद में वर्ष 2019-20 में लगभग 1300 फाइलेरिया के मरीज पंजीकृत थे। जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीजों का इलाज विभाग की तरफ से मुफ्त किया जाता है। मरीज को पहले साल में चार बार दवा खिलाई जाती है। जबकि दूसरे साल में तीन बार तथा तीसरे साल में दो बार दवाई खिलाई जाती है। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि यह रोग मच्छर के काटने से होता है। लेकिन दवा खाकर इस रोग को हराया जा सकता है। हर साल एक बार राष्ट्रीय स्तर पर मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम के तहत फायलेरिया के रोगियों को खोजा जाता है।
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