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पांचवीं बार जीते मुख्तार अंसारी

Sat, 11 Mar 2017 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ Updated Sat, 11 Mar 2017 11:53 PM IST
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Fifth Winner Mukhtar Ansari
मुख्‍तार अंसारी
उत्तर प्रदेश की सबसे हाट सीटों में शुमार सदर विधानसभा सीट बाहुबली मुख्तार अंसारी के चलते चर्चा में रही। इस सीट पर न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकर बाहुबलियों को ललकारा था और यहां के बाहुबली के लिए भासपा प्रत्याशी को कटप्पा की संज्ञा दी थी। यही नहीं  बसपा सुप्रीमो मायावती ने यहां के मतदाताओं को तो यहां तक कह डाला था कि बाहुबली को जिताकर पीएम को जवाब दे दो। हालांकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बाहुबली का नाम तक नहीं लिया था। बावजूद इसके मुख्तार का तिलस्म नहीं टूटा और इस सुनामी में भी मुख्तार का किला चट्टान की भांति अडिग रहा और उन्हें पांचवीं बार जीत हासिल हुई।
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   जिले की चार विधानसभा सीटों पर वैसे तो तीन पर भाजपा की आंधी चली। मधुबन में भाजपा से दारा चौहान, घोसी से छठवीं बार फागू चौहान एवं मुहम्मदाबाद गोहना से तीसरी बार श्रीराम सोनकर चुनाव जीते। प्रारंभ में उम्मीद तो यही लगाई जा रही थी कि सदर विधानसभा सीट पर इस बार भासपा-भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी महेंद्र राजभर और सपा के प्रत्याशी अल्ताफ अंसारी ने कड़ी टक्कर दी लेकिन बाद में मुख्तार अंसारी ने बाजी पलट दी और वह चुनाव जीत गए।
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   बता दें कि मुख्तार अंसारी सदर विधानसभा सीट पर 1996 से लगातार विधायक हैं। उन पर एक दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे हैं। मुख्तार अंसारी के चुनाव को लेकर प्रदेश की नजर इसलिए भी टिकी थी कि समाजवादी पार्टी में इनकी पार्टी कौमी एकता दल के विलय को लेकर मुलायम परिवार में ही दो फाड़ हो गया था।
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  आखिरकार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने न सिर्फ मुख्तार अंसारी को पार्टी में लेने से मना किया बल्कि सभी बाहुबलियों को सिरे से नकारा भी। बाद में अंसारी बंधुओं ने बसपा का दामन था।

   बसपा ने न सिर्फ सदर विधानसभा सीट से मनोज राय का टिकट काटकर मुख्तार अंसारी को दिया बल्कि घोसी से इनके बेटे अब्बास अंसारी को वसीम खां उर्फ चुन्नू खां का टिकट काटकर दिया गया। मुख्तार के भाई सिगबगतुल्लाह को भी गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद विधानसभा सीट से बसपा ने टिकट देकर पूर्वांचल में मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। बसपा की यह रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वांचल में प्रचार के बाद काम तो नहीं आई लेकिन सदर विधानसभा सीट पर मुख्तार अंसारी फिर भी चुनाव जीतकर अपने किले को ढहने से बचा लिये।
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