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अतिवृष्टि से बरबाद हुई फसलों की सही ढंग से नहीं हो पा रही फीडिंग

Tue, 16 Nov 2021 11:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Nov 2021 11:30 PM IST
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Feeding of crops destroyed by excessive rain is not being done properly
जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष तथा भाजपा किसान नेता राकेश सिंह ने जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी तथा मुख्य राजस्व अधिकारी को पत्र देकर मांग की है कि मऊ जनपद में 55 वर्षों में पहली बार सितंबर अक्टूबर माह में भीषण बाढ़ व तेज हवा के साथ बारिश से किसानों की फसलों की 33 प्रतिशत से अधिक भारी क्षति हुई है। इस बार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान के घर की पूँजी पानी में डूब कर नष्ट हो गई। जिला में कुछ तहसीलों में 26 अक्टूबर से तथा मऊ सदर तहसील में 30 अक्टूबर से किसानों की फसलों की क्षति की फीडिंग का कार्य लेखपालों ने बंद कर दिया है। किसान नेता ने आरापे लगाया है कि जिले में बहुत से किसानों के कागजात लेखपालों ने फेंक दिए और फीडिंग नहीं किए। कुछ लेखपाल सुविधा शुल्क लेकर के फसलों की क्षति की फिडिंग किए हैं।26 अक्टूबर तक जिले में मात्र 18333 किसानों की ही फीडिंग हुई है। किसान नेता ने कहा है कि देखा जाए तो अभी लगभग 8000 से अधिक किसानों की फसलों की क्षति की फीडिंग नहीं हो पाई है।उन्होंने मांग की है कि जिस आईडी पर लेखपाल फीडिंग कर रहे हैं उस आईडी पर किसानों को स्वयं फीडिंग की सुविधा प्रदान की जाए। किसान पासबुक- आधार -खतौनी तथा मोबाइल नंबर के साथ अपनी छति को फीड उस आईडी में अपलोड करता। राजस्व विभाग के अधिकारियों को सिर्फ जांच करके रिपोर्ट लगानी होती तो ऐसी मनमानी करने का मौका लेखपालों को नहीं मिल पाता और किसानोंको अपनी क्षति का मुआवजा भी मिल पाता। सरकार की मंशा के अनुरूप हर पीड़ित किसान को फसलों की क्षति का मुआवजा अनुदान शासन से किसान के खाता में आ जाता। किसान नेता ने जिलाधिकारी सहित अधिकारियों से मांग की है कि जिले की चारों तहसीलों के उप जिलाधिकारी व तहसीलदार को आदेश दिया जाए कि बाढ़ से फसलों की क्षति की फीडिंग लेखपाल से कराई जाए ताकि कोई किसान शासन के अनुदान से वंचित इस जिले में न हो सके। किसान नेता ने कहा है कि अगर ऐसा नहीं होता है तो किसानों के साथ सरासर अन्याय होगा इससे प्रदेश सरकार की छवि किसानों के दिल में खराब होगी।
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