{"_id":"5dd040df8ebc3e548f556f15","slug":"farmmar-mau-news-vns4947453163","type":"story","status":"publish","title_hn":"त्वरित कम्पोस्टिंग से युवा किसान कर सकते हैं उद्यमिता विकास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
त्वरित कम्पोस्टिंग से युवा किसान कर सकते हैं उद्यमिता विकास
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। परदहां ब्लाक क्षेत्र के कुशमौर स्थित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म ब्यूरो में चल रही पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला के तीसरे दिन किसानों एवं कृषि उद्यमियों को कृषि अपशिष्टों से उच्च गुणवत्ता युक्त कम्पोस्ट तैयार करने की विधियों पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने कहा कि त्वरित कम्पोस्टिंग वर्तमान में कृषि अवशेष, जो मूलत: समस्या बनते चले जा रहे हैं।
प्रबंधन के लिए किसानों के हाथों में एक उत्तम हथियार है। इस प्रक्रिया में कृषि अवशेषों को दो माह के भीतर ही पूर्ण रूप से कंपोस्ट खाद में बदल कर किसान अपने खेतों से फसलों द्वारा खींचे जा रहे पोषक तत्वों को बहुत हद तक लौटा सकते हैं। ऐसी मिट्टी जिसमें कार्बन तत्वों की अधिक मात्रा होती है, मिट्टी की जल धारण क्षमता और वायु संचरण को भी बढाते हैं। जिससे मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
कहा कि मिट्टी के जैविक एवं रासायनिक स्वास्थ्य के लिए कार्बनिक खाद वरदान है। प्रयोगशाला में कंपोस्ट प्रक्रिया को प्रभावित बैक्टीरिया एवं फफूंदों को कल्चर मीडिया पर उगाकर और रोपित करके दिखाया गया। युवा किसान कंपोस्टिंग के माध्यम से उद्यम विकास कर सकते हैं। खास तौर पर जो लोग वर्मी कम्पोस्टिंग से जुड़े हैं उनके लिए यह एक उत्तम अवसर है।
विज्ञापन
वैज्ञानिक डॉ. रेनू ने कंपोस्ट से सूक्ष्मजीवों को पृथक करने के तरीके और उसमें काम आने वाले अनेकों उपकरणों जैसे आटोक्लेव, लेमिनार एयर फ्लो, इन्क्युबेटर, पीएच एवं ई सी मीटर आदि के विषय में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. पवन शर्मा ने विशेष तौर पर सूक्ष्मजीवों के प्रयोग से जैविक कृषि अपनाने की बात कही। वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद साहू ने सूक्ष्मजीवों के द्वारा होने वाले पौधों के जैविक एवं अजैविक प्रबंधन के विषय में बताया।
बीज संस्थान की डॉ. कल्याणे कुमारी ने किसानों को बीज उत्पादन पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षुओं को सूक्ष्मजीव के माध्यम से कंपोस्ट फोर्टीफीकेसन के द्वारा गुणवत्ता संवर्धन पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर डॉ. सुधीर, डॉ. विवेक, डॉ. वंश, राजन सिंह, आशीष आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
प्रबंधन के लिए किसानों के हाथों में एक उत्तम हथियार है। इस प्रक्रिया में कृषि अवशेषों को दो माह के भीतर ही पूर्ण रूप से कंपोस्ट खाद में बदल कर किसान अपने खेतों से फसलों द्वारा खींचे जा रहे पोषक तत्वों को बहुत हद तक लौटा सकते हैं। ऐसी मिट्टी जिसमें कार्बन तत्वों की अधिक मात्रा होती है, मिट्टी की जल धारण क्षमता और वायु संचरण को भी बढाते हैं। जिससे मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
विज्ञापन
कहा कि मिट्टी के जैविक एवं रासायनिक स्वास्थ्य के लिए कार्बनिक खाद वरदान है। प्रयोगशाला में कंपोस्ट प्रक्रिया को प्रभावित बैक्टीरिया एवं फफूंदों को कल्चर मीडिया पर उगाकर और रोपित करके दिखाया गया। युवा किसान कंपोस्टिंग के माध्यम से उद्यम विकास कर सकते हैं। खास तौर पर जो लोग वर्मी कम्पोस्टिंग से जुड़े हैं उनके लिए यह एक उत्तम अवसर है।
विज्ञापन
वैज्ञानिक डॉ. रेनू ने कंपोस्ट से सूक्ष्मजीवों को पृथक करने के तरीके और उसमें काम आने वाले अनेकों उपकरणों जैसे आटोक्लेव, लेमिनार एयर फ्लो, इन्क्युबेटर, पीएच एवं ई सी मीटर आदि के विषय में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. पवन शर्मा ने विशेष तौर पर सूक्ष्मजीवों के प्रयोग से जैविक कृषि अपनाने की बात कही। वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद साहू ने सूक्ष्मजीवों के द्वारा होने वाले पौधों के जैविक एवं अजैविक प्रबंधन के विषय में बताया।
बीज संस्थान की डॉ. कल्याणे कुमारी ने किसानों को बीज उत्पादन पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षुओं को सूक्ष्मजीव के माध्यम से कंपोस्ट फोर्टीफीकेसन के द्वारा गुणवत्ता संवर्धन पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर डॉ. सुधीर, डॉ. विवेक, डॉ. वंश, राजन सिंह, आशीष आदि शामिल रहे।