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किसान, मजदूर तय करें मूल्य
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Mon, 01 Feb 2016 11:21 PM IST
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किसानों-बुनकर, मजदूरों को अपने उत्पाद का एमआरपी तय करने का हक दिया जाए। इसके लिए लंबे समय तक संघर्ष करने की जरूरत है। यह आवाज उठी एबी बर्धन की याद में राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ के तत्वाधान में हिंदी भवन सभागार में आयोजित गोष्ठी में। सर्वदलीय संगोष्ठी में आगंतुकों ने किसानों-बुनकर, मजदूरों के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर विचार रखा।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कबीरपंथी विचारक अनुभव दास ने कहा कि किसान-बुनकर-मजदूरों के पक्ष में खड़ा होने वाले वामपंथियों में कुछ ने शस्त्र उठाकर धोखा खाया तो कुछ ने संसद में जाकर धोखा खाया। अभी भी किसान-बुनकर मजदूरों का सवाल जस का तस है।
कार्यक्रम का शुभारंभ एबी बर्धन के चित्र पर पुष्पांजलि और अतिथियों का स्वागत के उपरांत डॉ. संजय राय ने किताबों से दोस्ती- राहुल सांकृत्यायन घुमंतू बुक स्टाल का सभी अतिथियों के साथ फीता काटकर किया। मुख्य अतिथि विश्वनाथ शास्त्री ने कहा कि यह समय किसानों, बुनकरों व मजदूरों के समक्ष एकजुट होने का है।
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उन्होंने कहा कि किसानों और बुनकरों के उत्पादों की एमआरपी तय कराए जाने के लिए लंबे संघर्ष की जरूरत है। इस संदर्भ में राज्यसभा सदस्य सालिम अंसारी ने भी विचार रखे। सीपीएम के राज्य सचिव डॉ. हीरालाल यादव ने कहा कि एबी बर्धन जिस धारा के नेता थे, उसी रास्ते पर चलकर किसान-बुनकर-मजदूरों के समक्ष खड़ी चुनौतियों से मुकाबला किया जा सकता है।
कांग्रेस नेत्री राना खातून ने कहा कि बुनकरों व किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए बुद्धिजीवियों को रास्ता दिखाना होगा। आज की यह गोष्ठी उसी दिशा में उठाया गया कए कदम है। पूर्व विधायक इम्तेयाज अहमद ने कहा कि एबी बर्धन व अब्दुल वाकी ने 1972 के बुनकर आंदोलन में उनकी तीनों मांगों को मानने के लिए हुकूमत को मजबूर किया था।
आज पुन: किसानों-बुनकरों को मजबूत आंदोलन की जरूरत है। आज भी जाति, धर्म से ऊपर उठकर यह सवाल उठाना होगा। भाकपा माले के नेता ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि किसान-बुनकरों की समस्याएं ज्यों-ज्यों बढ़ती जा रही हैं, कारपोरेट घरानों का मुनाफा बढ़ता जा रहा है।
भाजपा नेता भरतलाल राही ने कहा कि सभी दल किसान-बुनकर-मजदूरों को सीढ़ी बनाकर सत्ता तक पहुंचते हैं, और फिर उन्हें भूल जाते हैं। सपा नेता पूर्व पालिकाध्यक्ष तैय्यब पालकी ने कहा कि सरकारी नीतियां किसान-बुनकर-मजदूरों के हितों के विपरीत बन रही हैं। किसानसभा के अध्यक्ष देवेंद्र मिश्र, डॉ. सईदुल्ला शाह, डा. जमाली ने भी अपने विचार रखे।
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गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कबीरपंथी विचारक अनुभव दास ने कहा कि किसान-बुनकर-मजदूरों के पक्ष में खड़ा होने वाले वामपंथियों में कुछ ने शस्त्र उठाकर धोखा खाया तो कुछ ने संसद में जाकर धोखा खाया। अभी भी किसान-बुनकर मजदूरों का सवाल जस का तस है।
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कार्यक्रम का शुभारंभ एबी बर्धन के चित्र पर पुष्पांजलि और अतिथियों का स्वागत के उपरांत डॉ. संजय राय ने किताबों से दोस्ती- राहुल सांकृत्यायन घुमंतू बुक स्टाल का सभी अतिथियों के साथ फीता काटकर किया। मुख्य अतिथि विश्वनाथ शास्त्री ने कहा कि यह समय किसानों, बुनकरों व मजदूरों के समक्ष एकजुट होने का है।
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उन्होंने कहा कि किसानों और बुनकरों के उत्पादों की एमआरपी तय कराए जाने के लिए लंबे संघर्ष की जरूरत है। इस संदर्भ में राज्यसभा सदस्य सालिम अंसारी ने भी विचार रखे। सीपीएम के राज्य सचिव डॉ. हीरालाल यादव ने कहा कि एबी बर्धन जिस धारा के नेता थे, उसी रास्ते पर चलकर किसान-बुनकर-मजदूरों के समक्ष खड़ी चुनौतियों से मुकाबला किया जा सकता है।
कांग्रेस नेत्री राना खातून ने कहा कि बुनकरों व किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए बुद्धिजीवियों को रास्ता दिखाना होगा। आज की यह गोष्ठी उसी दिशा में उठाया गया कए कदम है। पूर्व विधायक इम्तेयाज अहमद ने कहा कि एबी बर्धन व अब्दुल वाकी ने 1972 के बुनकर आंदोलन में उनकी तीनों मांगों को मानने के लिए हुकूमत को मजबूर किया था।
आज पुन: किसानों-बुनकरों को मजबूत आंदोलन की जरूरत है। आज भी जाति, धर्म से ऊपर उठकर यह सवाल उठाना होगा। भाकपा माले के नेता ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि किसान-बुनकरों की समस्याएं ज्यों-ज्यों बढ़ती जा रही हैं, कारपोरेट घरानों का मुनाफा बढ़ता जा रहा है।
भाजपा नेता भरतलाल राही ने कहा कि सभी दल किसान-बुनकर-मजदूरों को सीढ़ी बनाकर सत्ता तक पहुंचते हैं, और फिर उन्हें भूल जाते हैं। सपा नेता पूर्व पालिकाध्यक्ष तैय्यब पालकी ने कहा कि सरकारी नीतियां किसान-बुनकर-मजदूरों के हितों के विपरीत बन रही हैं। किसानसभा के अध्यक्ष देवेंद्र मिश्र, डॉ. सईदुल्ला शाह, डा. जमाली ने भी अपने विचार रखे।