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सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य : जिलाधिकारी
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सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए ‘किसान पहचान पत्र’ अनिवार्य हो गया है। इसकी जानकारी बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने देते हुए बताया कि अब सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए ‘किसान पहचान पत्र’ (फार्मर आईडी) होना अनिवार्य कर दिया गया है।
कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और वास्तविक लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि भारत सरकार की ‘एग्रीस्टैक’ योजना के तहत जनपद मऊ में लगभग 75 प्रतिशत किसानों की आईडी तैयार की जा चुकी है।
शेष बचे किसानों के पंजीकरण हेतु जनपद के समस्त ग्राम पंचायतों में 6 से 15 अप्रैल 2026 तक विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की आगामी किस्तें केवल उन्हीं कृषकों को हस्तांतरित की जाएंगी, जिनका किसान पहचान पत्र जारी हो चुका है।
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इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा वितरित किए जाने वाले बीज, उर्वरक, कीटनाशी और अन्य निवेशों के चयन हेतु अब किसान आईडी ही मुख्य आधार होगी। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं, धान, दलहन और सरसों की बिक्री करने से पूर्व किसानों के पहचान पत्र का सत्यापन अनिवार्य होगा। बिना आईडी के सरकारी खरीद संभव नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि मई 2026 से पीओएस मशीनों के माध्यम से खाद वितरण की प्रक्रिया को भी ‘एग्रीस्टैक’ पोर्टल से जोड़ दिया जाएगा, जिसके लिए फार्मर आईडी अनिवार्य होगी। 31 मई 2026 के बाद उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और लघु सिंचाई जैसे सहयोगी विभागों की योजनाओं का लाभ भी इसी फार्मर आईडी के आधार पर दिया जाएगा।
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कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और वास्तविक लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि भारत सरकार की ‘एग्रीस्टैक’ योजना के तहत जनपद मऊ में लगभग 75 प्रतिशत किसानों की आईडी तैयार की जा चुकी है।
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शेष बचे किसानों के पंजीकरण हेतु जनपद के समस्त ग्राम पंचायतों में 6 से 15 अप्रैल 2026 तक विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की आगामी किस्तें केवल उन्हीं कृषकों को हस्तांतरित की जाएंगी, जिनका किसान पहचान पत्र जारी हो चुका है।
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इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा वितरित किए जाने वाले बीज, उर्वरक, कीटनाशी और अन्य निवेशों के चयन हेतु अब किसान आईडी ही मुख्य आधार होगी। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं, धान, दलहन और सरसों की बिक्री करने से पूर्व किसानों के पहचान पत्र का सत्यापन अनिवार्य होगा। बिना आईडी के सरकारी खरीद संभव नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि मई 2026 से पीओएस मशीनों के माध्यम से खाद वितरण की प्रक्रिया को भी ‘एग्रीस्टैक’ पोर्टल से जोड़ दिया जाएगा, जिसके लिए फार्मर आईडी अनिवार्य होगी। 31 मई 2026 के बाद उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और लघु सिंचाई जैसे सहयोगी विभागों की योजनाओं का लाभ भी इसी फार्मर आईडी के आधार पर दिया जाएगा।