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मिसाल: निशुल्क शिक्षा का आशीष बरसा रहा है आशीष

Sat, 26 Dec 2020 11:53 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2020 11:53 PM IST
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Example: Free education is blessing Ashish
रतनपुरा (मऊ)। शिक्षा के अभाव में गरीब माता पिता के नौनिहाल अशिक्षा के दलदल में न रह जाए। इस उद्देश्य से रतनपुरा ब्लाक के मुस्तफाबाद गांव में एक युवक सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रहा है। सकारात्मक बात यह है कि माता-पिता की मौत के बाद अकेले रह रहे युवक को यह नेक कार्य करने की प्रेरणा गांव की एक गरीब महिला से मिली।
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जब महिला ने अपनी तीन बेटियों को एक साथ निशुल्क पढ़ाने के लिए आशीष से गुहार लगाते हुए एक साथ तीनों बच्चियों को एक साथ शिक्षा न मिल सकने पर होने वाले अपराध बोध से अवगत कराया। महिला की यह बात आशीष के दिल में ऐसी चुभी कि वह गांव के सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए अपने घर में कोचिंग शुरू कर दिया। आशीष की इस कोचिंग में वर्तमान में 45 बच्चे पढ़ रहे हैं।
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मुस्तफाबाद गांव निवासी आशीष सिंह (24) रतनपुरा स्थित एक महाविद्यालय में बीए तृतीय के छात्र है। बीते एक सप्ताह से उनके सुनसान घर में रोजाना शाम 3.30 बजे से 5.30 बजे तक गांव के अधिकांश बच्चे पढ़ने को आते हैं। आशीष बताते है कि सेना से सेवानिवृत्त उनके पिता खड़क सिंह तथा माता माधुरी देवी के निधन के बाद वह घर पर अकेले रहते हैं। उनकी शादीशुदा दो बहनें पूनम तथा रीता कभी कभी घर पर आती हैं, लेकिन अधिकांश समय वह घर पर अकेले ही रहता है। करीब एक सप्ताह पहले गांव की एक गरीब महिला आशीष के पास पहुंचकर अपनी गरीबी के बारे में बताते हुए उससे अपने तीनों बेटियों को नि:शुल्क पढ़ाने की बात कही।
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आशीष ने बताया कि महिला की बात सुनने के बाद उसने अगले दिन महिला के तीनों बेटियों के साथ गांव के कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। केवल दो तीन दिन के अंदर उसके घर पर निशुल्क शिक्षा लेने के लिए 45 से ज्यादा बच्चे पहुंच गए। आशीष बताते हैं कि उन्होंने अपनी कोचिंग में बच्चों के उम्र के अनुसार तीन वर्ग में बांटा है। इस प्रयास से जो बच्चे शिक्षा के अभाव में इधर-उधर समय काटते थे वे कोचिंग में जाने लगे है। उधर युवक के इस नेक कार्य को लेकर गांव के लोग भी उसकी सराहना करते नजर आते है।
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