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Mau News: हर 13वीं गर्भवती की जान को खतरा, 40 पीएचसी और दस सीएचसी पर केवल तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ

Tue, 26 May 2026 12:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2026 12:04 AM IST
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Every 13th pregnant woman faces life-threatening situation, with only three gynecologists at 40 PHCs and 10 CHCs.
स्वास्थ्य की जांच करातीं गर्भवती महिलाएं।  फाइल फोटो
जनपद में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई रिपोर्ट चिंताजनक है। बीते तीन वर्षों में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ी है। वहीं डिलीवरी के दौरान जान का खतरा भी बढ़ा है। 40 पीएचसी और 10 सीएचसी में केवल तीन स्थाई स्त्री रोग विशेषज्ञ ही हैं।
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2025-26 में 44,760 जांच में 3,476 हाई रिस्क मामले हैं। जो लगभग 7.7 प्रतिशत बनते हैं, यानी हर 13वीं गर्भवती हाई रिस्क श्रेणी में है। बडरांव ब्लॉक और रतनपुरा ब्लॉक में हालात सबसे अधिक गंभीर हैं। बडरांव में 19.1 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में पाई गई हैं।
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बडरांव में 3141 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई, जिनमें 600 से अधिक महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में हैं। 3500 की जांच में 450 से ज्यादा यानि करीब 12.89% गर्भवती हाई रिस्क श्रेणी में हैं।
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उधर, इसको लेकर अब जिले के 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज शुरू करने का दावा विभाग ने किया है लेकिन हकीकत यह है कि जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में से केवल तीन केंद्रों पर ही स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती है।
गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के दौरान जान का खतरा होने की स्थिति को मेडिकल साइंस की भाषा में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी कहा जाता है। महिलाओं में कुपोषण, खून की कमी, शुगर, ब्लड प्रेशर, किडनी या लीवर की गंभीर बीमारियों के कारण डिलीवरी के दौरान जान का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा 18 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण भी इसकी वजह हो सकते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025-26 में 44 हजार 760 महिलाओं की जांच में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की संख्या 3 हजार 476 रही।
इस दौरान गर्भवती महिलाओं की मृत्यु संख्या 10 रही। वहीं 2024-25 में 42 हजार 217 महिलाओं की जांच में हाई रिस्क महिलाओं की संख्या 3 हजार 125 रही थी। इस वर्ष मृत्यु संख्या 9 रही। वहीं 2023-24 में 42 हजार महिलाओं की जांच में 3 हजार से अधिक महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में थीं, जबकि मृत्यु संख्या 9 रही।
सही इलाज न मिलने पर हो सकता है खतरा
जिला महिला अस्पताल की वरिष्ठ महिला डॉक्टर चंदा सिन्हा ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में समय पर जांच और सही इलाज न मिले तो मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि पेट में तेज दर्द, लगातार सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, पैरों या चेहरे पर अत्यधिक सूजन तथा शिशु की हलचल कम होना हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लक्षण हैं।
इसके कारणों में मां की उम्र 18 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक होना, हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा या पुरानी बीमारियां शामिल हैं। इसमें नियमित जांच, विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह और अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।

हर महीने दो बार मनाया जाता है एचआरपी डे
एसीएमओ डॉ. बीके यादव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक माह दो बार एचआरपी डे मनाया जाता है। इस दिन गर्भवतियों की जांच की जाती है। औसतन प्रत्येक केंद्र पर 25 से 30 गर्भवती जांच के लिए आती हैं। इनमें से कई महिलाएं खून की कमी या अन्य कारणों से हाई रिस्क श्रेणी में आती हैं।
पहले इन मरीजों का उपचार जिला अस्पताल में ही संभव था, लेकिन अब जिले के 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपचार की व्यवस्था की जा रही है। वहां एनीमिया कक्ष बनने से उन्हें उसी दिन केंद्र पर इलाज मिल सकेगा। इसके अलावा आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को पोषण के प्रति जागरूक करती हैं। सभी ब्लॉकों में समय पर जांच कर परामर्श और दवा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे सुरक्षित डिलीवरी कराई जा सके।


स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी भी बड़ी समस्या
जिले के सरकारी अस्पतालों में महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है। जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार केवल मुहम्मदाबाद गोहना, फतेहपुर मंडाव और दोहरीघाट सीएचसी में ही महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती है।
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