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एस्केलेटर-लिफ्ट की सुविधा, फिर भी रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर यात्री
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रेलवे स्टेशन पर बंद पड़ा एस्केलेटर।संवाद
- फोटो : MAU
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मऊ। मऊ जंक्शन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के बाद भी इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है। रेलवे स्टेशन पर लाखों रुपये की लागत से बनी स्वचालित सीढ़ी (एस्केलेटर) और लिफ्ट के आए दिन बंद रहने के कारण यात्रियों को काफी दिक्कत हो रही है। नियमित रूप से एस्केलेटर का संचालन न होने से रेल यात्रियों को प्लेटफार्म बदलने के लिए रेलवे ट्रैक पार कर जाना पड़ता है। इससे सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों तथा दिव्यांगों को उठानी पड़ रही है। लोगों ने इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन स्थित जस की तस बनी हुई है।
मऊ जंक्शन पर लाखों की लागत से स्वचलित सीढ़ी का निर्माण कराए जाने पर लोगों को बेहतर सुविधा की आस जगी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते यात्रियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिकायतों के बाद भी इसका संचालन सही ढंग से नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि आए दिन टेक्निकल फाल्ट के चलते स्वचलित सीढ़ी का संचालन नहीं होता है।
इस संबंध में बाला जी मोदी का कहना है कि आए दिन स्वचलित सीढ़ी आए दिन बंद मिलती है। जिस कारण प्लेटफार्म पर जाने के लिए असुविधा का सामना करना पड़ता है। आदित्य तिवारी का कहना है कि लाखों की लागत से बने लिफ्ट का लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है। आशीष वर्मा और श्याम चौहान का कहना है कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक से तीन पर जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार कर जाना पड़ता है।
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प्लेटफार्म संख्या दो और चार पर जाना बना खतरनाक
मऊ। विद्युतीकरण के दौरान रेलवे स्टेशन के दक्षिणी तरफ बने फुट ओवरब्रिज तो तोड़ दिए जाने के बाद से यात्रियों की समस्याएं बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि प्लेटफार्म संख्या एक से दो और चार पर जाना काफी खतरनाक साबित हो रहा है। यात्रियों को सामान लेकर रेलवे ट्रैक पार कर प्लेटफार्म पर जाना पड़ रहा है।
प्लेटफार्म पर लगे वाटर कूलर में नहीं आता ठंडा पानी
मऊ। यात्रियों के शीतल पेयजल की सुविधा मुहैया कराने को लेकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर लगाए गए वाटर कूलर का समुचित लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है। वहीं वाटर कूलर से ठंडा पानी न आने की शिकायतों के बाद भी रेलवे प्रबंधन द्वारा इन्हें सही नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में ठंडे पानी के लिए यात्रियों को स्टाल से पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है।
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मऊ जंक्शन पर लाखों की लागत से स्वचलित सीढ़ी का निर्माण कराए जाने पर लोगों को बेहतर सुविधा की आस जगी, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते यात्रियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिकायतों के बाद भी इसका संचालन सही ढंग से नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि आए दिन टेक्निकल फाल्ट के चलते स्वचलित सीढ़ी का संचालन नहीं होता है।
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इस संबंध में बाला जी मोदी का कहना है कि आए दिन स्वचलित सीढ़ी आए दिन बंद मिलती है। जिस कारण प्लेटफार्म पर जाने के लिए असुविधा का सामना करना पड़ता है। आदित्य तिवारी का कहना है कि लाखों की लागत से बने लिफ्ट का लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है। आशीष वर्मा और श्याम चौहान का कहना है कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक से तीन पर जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार कर जाना पड़ता है।
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प्लेटफार्म संख्या दो और चार पर जाना बना खतरनाक
मऊ। विद्युतीकरण के दौरान रेलवे स्टेशन के दक्षिणी तरफ बने फुट ओवरब्रिज तो तोड़ दिए जाने के बाद से यात्रियों की समस्याएं बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि प्लेटफार्म संख्या एक से दो और चार पर जाना काफी खतरनाक साबित हो रहा है। यात्रियों को सामान लेकर रेलवे ट्रैक पार कर प्लेटफार्म पर जाना पड़ रहा है।
प्लेटफार्म पर लगे वाटर कूलर में नहीं आता ठंडा पानी
मऊ। यात्रियों के शीतल पेयजल की सुविधा मुहैया कराने को लेकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर लगाए गए वाटर कूलर का समुचित लाभ यात्रियों को नहीं मिल रहा है। वहीं वाटर कूलर से ठंडा पानी न आने की शिकायतों के बाद भी रेलवे प्रबंधन द्वारा इन्हें सही नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में ठंडे पानी के लिए यात्रियों को स्टाल से पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है।