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Mau News: सरकारी अस्पताल में एलाइजा रिपोर्ट आ रही है निगेटिव, निजी अस्पतालों में हो रहा है डेंगू का उपचार

Sun, 12 Oct 2025 12:54 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 12 Oct 2025 12:54 AM IST
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ELISA reports are coming negative in government hospitals, dengue treatment is being done in private hospitals.
जिला अस्पताल में बनाया गया डेंगू वार्ड।संवाद
रजनीकांत पांडेय
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मऊ। जिले में बीते 40 दिन में डेंगू के 546 संदिग्ध मरीज मिले हैं। इसमें केवल एक मरीज ही जिला अस्पताल में भर्ती हुआ है, जबकि 15 से ज्यादा मरीज नगर के तीन बड़े निजी अस्पताल में बीते 40 दिन में उपचार करा चुके हैं। 40 दिनों में 546 मरीजों का एलाइजा टेस्ट हुआ था। सबकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इन मरीजों का उपचार ऐसे तो डेंगू के ट्रीटमेंट के तौर पर हुआ है लेकिन न तो निजी अस्पताल के डॉक्टर ने इसे डेंगू मरीज माना है न ही स्वास्थ्य विभाग ने। कारण शासन की ओर से जारी एडवाइजरी के अनुसार एलाइजा जांच की पॉजीटिव रिपोर्ट के बिना मरीज को डेंगू पीड़ित नहीं माना जाएगा। जिले में इस साल अब तक एक भी डेंगू के मरीज नहीं मिले हैं जबकि बीते साल भी यह आंकड़ा शून्य था।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों में डेंगू पीड़ितों की संख्या शून्य है, जबकि सितंबर में ही शहर के तीन बड़े निजी अस्पतालों में 15 से ज्यादा डेंगू पीड़ितों का उपचार किया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि यह संदिग्ध मरीज हैं, क्योंकि एलाइजा जांच में इनकी रिपोर्ट निगेटिव मिली है। इस साल सितंबर के 30 दिन में 10 सरकारी अस्पतालों में एक भी डेंगू पीड़ित इलाज कराने नहीं पहुंचे। वहीं जिला अस्पताल में छह बेड के डेंगू वार्ड में तीन बुखार के मरीजों का उपचार किया गया।
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जिले में बुखार पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हालात यह है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में 800 से 900 लोगों में 40 फीसदी मरीज वायरल फीवर के आ रहे हैं। यहीं स्थिति जिले की 10 सीएचसी की ओपीडी के साथ हर रविवार को 40 पीएचसी पर आयोजित होने वाले सीएम आरोग्य मेले में देखने को मिल रही है। जिले में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक डेंगू और मलेरिया के एक भी मरीज की पुष्टि नहीं हुई है। उधर, सितंबर में नगर के तीन बड़े निजी अस्पतालों में डेंगू के 15 से ज्यादा मरीजों का उपचार हुआ है, जबकि इससे कहीं अधिक संख्या में लोगों ने डेंगू पुष्टि होने के डॉक्टर से घर पर रहकर उपचार कराया है। दूसरी ओर डेंगू मलेरिया की रोकथाम को लेकर जिला अस्पताल में छह बेड का जबकि 10 सीएचसी पर चार-चार बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया है। सीएचसी पर बने 40 बेड में डेढ़ महीने में एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है।
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तीन साल पहले तक मिल रहे थे मरीज, अब नहीं मिलते
बताते चलें कि वर्ष 2021 से 2020 तक डेंगू के मरीजों की संख्या शून्य थी। 2023 में यह आंकड़ा 100 तो वर्ष 2023 में यह संख्या 32 थी। 2023 में अब तक जिले में सबसे ज्यादा डेंगू पीड़ित मिले थे। इसमें महज 17 ने ही सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया था। वहीं 2024 में डेंगू मरीजों का आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग ने शून्य बताया था।
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एलाइजा जांच निगेटिव, लेकिन मरीजों में डेंगू जैसे लक्षण
बरसात के बाद डेंगू का खतरा बढ़ने के बाद सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में संदिग्ध रोगी पहुंचने लगे हैं। कार्ड टेस्ट में ऐसे रोगियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है, लेकिन एलाइजा जांच में डेंगू की पुष्टि नहीं हो रही है। बुखार के मरीजों की जांच रिपोर्ट नॉर्मल आ रही है, लेकिन लक्षण डेंगू, मलेरिया जैसे ही हैं। हालांकि, चिकित्सक लक्षणाें को देखते हुए ही मरीजाें का उपचार कर रहे हैं।
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मच्छरदानी थी, टीम को देखते हुए लगाया मच्छरदानी
डेंगू मरीजों की पड़ताल को लेकर जब अमर उजाला की टीम डेंगू वार्ड पहुंची तो यहां पहले से किसी दूसरी बीमारी के मरीज भर्ती मिले। टीम को देखते हुए उन मरीजों को आनन फानन में दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया। बिना मच्छरदानी के बने वार्ड के बेड पर अमर उजाला की टीम को देखते ही मच्छरदानी लगाया जाना लगा।
केस 1
दोहरीघाट ब्लॉक के सिहरही बर्जला निवासी अश्वनी राय जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती है। अमर उजाला को बताया कि पिता द्वारा जांच कराया गया, जिसमें उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव होने के बाद उसने खुद को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि अभी मरीज का एलाइजा जांच होगी, रिपोर्ट पाॅजीटिव होने के बाद ही इसे डेंगू मरीज माना जाएगा।
केस दो
नगर के इमिलया निवासी धर्मशक्ति पाठक ने बताया कि बलिया में एक सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। बीते दिनों तबीयत खराब होने पर उन्होंने जांच कराई, जहां उन्होंने एक निजी चिकित्सक के परामर्श लेकर उपचार कराया। जहां अब वह बिल्कुल स्वास्थ्य हैं।

कोट
डेंगू मरीजों की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग उसी समय करता है जब एलाइज रिपोर्ट पॉजीटिव होती है। वर्तमान में अभी तक ऐसे मरीज की पुष्टि नहीं हुई है। इन दिनों वायरल फैल रहा है। इससे मरीजों की प्लटलेट्स कम हो रही है। यह वायरल का बदला स्वरूप है। बुखार होने पर समय से चिकित्सक को दिखाएं और खानपान का ध्यान रखें। प्लेटलेट्स घटने का रुझान होने पर समय रहते मरीज की जरूरी देखभाल हो जाने से जिंदगी खतरे में पड़ने की संभावना कम हो जाती है।
- डॉ. राहुल सिंह, सीएमओ

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में डेंगू पीड़ित
वर्ष 2022 : 32
वर्ष 2023 : 100
वर्ष 2024 : 0
वर्ष 2025: 0

जिला अस्पताल में बनाया गया डेंगू वार्ड।संवाद

जिला अस्पताल में बनाया गया डेंगू वार्ड।संवाद

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