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तीन दिन में भर्ती हुए आठ कुपोषित बच्चे

Thu, 16 Sep 2021 10:26 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Sep 2021 10:26 PM IST
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Eight malnourished children admitted in three days
जिला अस्पताल स्थित पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती कुपोषित बच्चे।संवाद - फोटो : MAU
अति कुपोषित बच्चों को ढूंढ कर उन्हें पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने को लेकर सख्ती बरती गई है। इसका परिणाम यह है कि आरबीएसके टीम ने तीन दिनों में दस बेड के न्यूट्रीशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी) में आठ अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराया है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी के प्रभार संभालने वाले ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अजय गौतम ने अतिकुपोषित बच्चों को लेकर पिछले दिनों गंभीरता दिखाई थी। बीते पांच माह में जहां केवल 14 बच्चें भर्ती हुए थे, वहां तीन दिन में ही न केवल आठ बच्चे भर्ती हुए हैं।
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महिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगस्त तक 22 हजार 983 कुपोषित बच्चे हैं, जबकि 5554 अतिकुपोषित बच्चे हैं। बीते माह तक अतिकुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाने में स्वास्थ्य विभाग की 18 आरबीएसके टीमें तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के 25 सौ से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सक्रिय नहीं थीं। परिणाम यह रहा कि अगस्त में तीन, जुलाई में सात, जून में दो, मई में शून्य जबकि अप्रैल में केवल दो अतिकुपोषित बच्चे इस केंद्र पर भर्ती कराए गए। जबकि इस माह में बीते चार दिनों में आठ कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जा चुका है। इसमें तीन अतिकुपोषित बच्चे नेहा, मुन्नी, रिया को 14 सितंबर को भर्ती कराया गया, बल्कि अन्य बच्चों को बीते 72 घंटे में भर्ती कराया गया। चौंकाने वाली बात है कि जिले के नौ ब्लाकों में गठित 18 आरबीएसके टीमों ने इन बच्चों को भर्ती कराया जबकि इन्हीं टीमों को जिले में सर्वे करने के बाद भी कुपोषित बच्चे ढूंढे नहीं मिल रहे थे।
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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अजय कुमार गौतम ने बताया कि कई बार पोषण पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण कर चुके हैं। वहां व्याप्त अव्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने के साथ ही विभाग के सभी सीडीपीओ तथा स्वास्थ्य विभाग के आरबीएसके टीम को कुपोषण दूर करने में लापरवाही न बरतने के साथ कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने का निर्देश दिया है।
इनसेट
वर्षों से थी समस्या, कुछ दिन में हुईं दूर
मऊ। पोषण पुर्नवास केेंद्र पर कई समस्याएं बीते कई वर्षों से थी। इसकी जानकारी जिला अस्पताल के सीएमएस से लेकर सीएमओ, डीपीओ को भी थी, लेकिन इसे दूर करने की कवायद नहीं की गई। पोषण पुर्नवास केंद्र के पास खुला एक रास्ता था, दरवाजा न होने से आए दिन जानवरों डर रहता था। इसके अलावा केंद्र के डाक्टर कक्ष जर्जर हो गया था, पोषण पुनर्वास केंद्र में बने बाथरूम में समस्या थी। बुधवार को खुले जगह को दरवाजा लगाकर बंद किया जा रहा था, वहीं डॉक्टर कक्ष का रंगरोगन के साथ दूसरी समस्याओं को दूर किया किया जा रहा है।

कोट
पोषण पुनर्वास केंद्र में नोडल अधिकारी के तौर पर सदर सीडीपीओ राधेश्याम पाल को बनाया गया है। एनआरसी में सुविधाओं की प्रतिदिन रिपोर्टिंग नोडल अधिकारी कर रहे हैं। ब्लाकों में आरबीएसके की टीमें कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के लिए क्या कदम उठा रही हैं, उसकी भी मानीटरिंग की जा रही है।- अजय गौतम, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
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