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जलस्तर में वृद्धि से दोहरीघाट से मधुबन के तटवर्ती इलाकों में बढ़ी बेचैनी

Mon, 30 Aug 2021 10:35 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 30 Aug 2021 10:35 PM IST
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Due to the rise in water level, there is increased uneasiness in the coastal areas of Madhuban from Dohrighat
दोहरीघाट/दुबारी । सरयू नदी का जलस्तर जैसे-जैैसे खतरा बिंदु की तरफ बढ़ रहा है। वैसे-वैसे कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। बंधों और भारत माता मंदिर के पीछे दीवारों पर नदी की तेज लहरें टकरा रही हैं। इससे ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। मधुबन के देवारा में नदी का जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहने से तटवर्ती गांवों के लोगों की बेचैनी बढ़ती ही जा रही है। बिंदटोलिया सहित तीन किमी एरिया में कटान जारी रहने से लोगों को भूमिहीन तथा बेघर होने की चिंता सताने लगी है।
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सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि का कार्य जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी के किनारे स्थित तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़, कटान का खतरा बढ़ गया है। बंधों और भारत माता मंदिर के पीछे दीवारों पर नदी की तेज लहरें टकरा रही हैं। सोमवार को जलस्तर 70.30 मीटर पर पहुंच गया। रविवार को घाघरा का जलस्तर 70.25 मीटर रहा। गौरीशंकर घाट पर लगे मीटर गेज पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर है। खतरा बिंदु से नदी 40 सेमी ऊपर बह रही थी।
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घाघरा की लहरें मुक्तिधाम शवदाह स्थल पर सीधे टकरा रही है।वहीं भारत माता मंदिर के पीछे नदी अभी भी बेरोकलिंग कर रही है,जिससे भारत माता मंदिर पर कटान का खतरा बढ़ता ही जा रहा है।साथ ही नगर के शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, डीह बाबा मंदिर, दुर्गा मंदिर,खाकी बाबा की कुटी सहित अन्य ऐतिहासिक धरोहरों पर कटान का खतरा बढ़ गया है।जलस्तर के बढ़ने के साथ ही तटवर्ती नवली, सरहरा, नई बाजार, चिऊटीडांड, रामपुर धनौली, बहादुरपुर, पतनई सहित आदि तटवर्ती इलाकों में उपजाऊ भूमि कटान के मुहाने पर आ गई है। वही नवली के देवारा क्षेत्र में कटान तेजी से होने के कारण लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। देवारा क्षेत्रों में कटान तेज गया है।
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वहीं मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा में नदी की ऊफनती लहरों का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों की बेचैनी बढ़ती ही जा रही है। नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से तीन दर्जन गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। हजारों एकड़ फसलें डूबने से नष्ट होने के कगार पर है। परसिया जयराम गिरी हाहा नाला पर नदी जलस्तर 66.21 मीटर तक पहुंच गया है। जबकि खतरा निशान 66.31 मीटर है। कटान तीन किमी एरिया में कटान जारी रहने से लोगों को भूमिहीन तथा बेघर होने की चिंता सताने लगी है। कटान जारी रहने से दुबारी के देवारा बिशुन पुरवा के लोग पलायन करने लगे हैं। बिशुन पुरवा के कटान पीड़ितों का कहना है कि खेत कटकर घाघरा नदी में विलीन हो गया है। सिर्फ मकान ही है।
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