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Mau News: गैस सिलिंडर की मार से सादगी मजबूरी शादियों में मेहमान और मेन्यू दोनों घटे

Wed, 15 Apr 2026 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2026 12:03 AM IST
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Due to the impact of gas cylinders, both guests and menu reduced in weddings due to compulsion of simplicity.
नगर के रोडवेज स्थित एक होटल पर कोयले के चूल्हे पर रोटी सेकता दुकानदार।संवाद
दो दिन बाद शुरू हो रहे सहालग में इस बार शादियों की रौनक के बीच रसोई गैस की किल्लत बड़ी चुनौती बन गई है। जिले में इस सीजन में करीब 900 से 1000 शादियां होने का अनुमान है। ऐसे में रसोई गैस की कमी ने वर-वधू दोनों पक्षों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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मेन्यू और मेहमानों की सूची सीमित हो रही है। स्थिति यह है कि सिलिंडर की व्यवस्था न होने पर पहली बार जिला पूर्ति कार्यालय में व्यावसायिक सिलिंडर के लिए 50 से अधिक आवेदन आए हैं।
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वहीं विभाग के पास बड़े व्यावसायिक सिलिंडरों की तुलना में केवल पांच किलो वाले छोटे सिलिंडरों का ही पर्याप्त स्टॉक है। इसे देखते हुए विभाग ने 800 से अधिक सिलिंडरों की मांग भेजी है, ताकि सहालग में आवेदन करने वाले लोगों को गैस उपलब्ध कराई जा सके।
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इस किल्लत का असर यह हुआ है कि कैटरर्स ने करीब 20 प्रतिशत तक अपने शुल्क बढ़ा दिए हैं। वहीं सिलिंडर कम मिलने के कारण लोगों ने मेहमानों की सूची में कटौती भी शुरू कर दी है।
सहालग के दौरान जिले में रोजाना व्यावसायिक सिलिंडरों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में 30–40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, लेकिन आपूर्ति में वृद्धि 10–15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो पाती। वर्तमान में व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति और भी कम होकर लगभग 20 प्रतिशत रह गई है। यही अंतर किल्लत और अव्यवस्था की मुख्य वजह बन रहा है।
कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े संतोष बताते हैं कि एक बड़े कार्यक्रम में 20–25 सिलिंडरों की आवश्यकता होती है, लेकिन इस समय 10–12 ही मिल पा रहे हैं। मजबूरी में लकड़ी और कोयले का उपयोग करना पड़ रहा है।
कैटर अशोक का कहना है कि इंडक्शन और इलेक्ट्रिक प्लेट से पूरा काम संभव नहीं है। गैस का विकल्प तो है, लेकिन यह पूर्ण समाधान नहीं है।
मैरिज लॉन संचालक संघ के अध्यक्ष राजा ज्योति सिंह के अनुसार जिले में 100 से अधिक मैरिज लॉन/बैंक्वेट हॉल संचालित हैं, जिनमें अधिकांश की बुकिंग फुल है। गैस की अनिश्चितता के कारण बैकअप के तौर पर लकड़ी-कोयला और अतिरिक्त चूल्हे लगाने पड़ रहे हैं, जिससे जोखिम भी बढ़ गया है। कुछ स्थानों पर व्यावसायिक सिलिंडर निर्धारित दर से 800 से 1000 रुपये अधिक में बेचे जा रहे हैं।
मेन्यू और मेहमानों की सूची हो रही सीमित : इसका असर शादी के मेन्यू पर भी स्पष्ट दिख रहा है। पहले जहां 20–25 व्यंजन परोसे जाते थे, अब उन्हें घटाकर 12–15 तक सीमित किया जा रहा है। मधुबन के राजेश ने बताया कि इस माह उनकी बेटी की शादी है। पहले उन्होंने विस्तृत मेन्यू तय किया था, लेकिन अब कुछ आइटम हटाने पड़े हैं।

साथ ही मेहमानों की सूची भी सीमित करनी पड़ी है। वहीं लकड़ी और कोयले की मांग बढ़ने से उनकी कीमतों में 20–25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। बिजली और जनरेटर के अतिरिक्त खर्च के कारण कुल लागत में 15–30 प्रतिशत तक इजाफा हो गया है।
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